मेरी चुनर दई है बिगार श्याम तेरो कहा बिगारो है (होली रसिया) लिरिक्स
Meri Chunar Dai Hai Bigar Shyam Tero Kaha Bigaro Hai Lyrics Lyrics
तर्ज (Tune): काउ दिन उठ गयो मेरो हाथ (बलम तोय ऐसो मारूंगी)
मेरी चुनर दई है बिगार, श्याम तेरो कहा बिगारो है। कहा बिगारो है, श्याम तेरो कहा बिगारो है॥
रस्ता रोक गली में ठाडो, मेरो सबरो काम बिगाड़ो। क्यों तुम ज्यादा बनो होशियार, श्याम तेरो कहा बिगारो है॥
डारे रंग मोपे सांवरिया, संग लायो बलदाऊ भैया। मनावे होली को त्यौहार, श्याम तेरो कहा बिगारो है॥
सब सखियन के पीछे पड़ के, काऊ से राज़ी, काऊ से लड़के। जाको हमपे न पावे पार, श्याम तेरो कहा बिगारो है॥
मैं हूँ यशोदा माँ को प्यारो, होली को मैंने लियो सहारो। करलऊँ तुमसे अखियाँ चार, श्याम तेरो कहा बिगारो है॥
अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'मेरी चुनर दई है बिगार' होली रसिया में गोपी श्री कृष्ण से क्या शिकायत कर रही है?
A1: गोपी शिकायत कर रही है कि कान्हा ने गली में रास्ता रोककर (ठाडो होकर), रंग डालकर उसकी चुनरी खराब कर दी है और उसका सारा काम बिगाड़ दिया है।
Q2: कान्हा गोपी को रंग लगाने किसके साथ आए हैं?
A2: भजन के अनुसार, साँवरिया (श्री कृष्ण) होली का त्यौहार मनाने के लिए अपने बड़े भाई बलदाऊ (बलराम) जी को साथ लेकर आए हैं।
Q3: श्री कृष्ण ने गोपी को रंग लगाने का क्या मीठा कारण बताया?
A3: भजन के अंतिम पद में श्री कृष्ण कहते हैं कि "होली को मैंने लियो सहारो, करलऊँ तुमसे अखियाँ चार" अर्थात् मैंने तो सिर्फ तुमसे आँखें मिलाने और अपना प्रेम जताने के लिए इस होली का बहाना लिया है।
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Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras, Holi Rasiya
Deity: Shri Radha-Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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