रंग डालो ना (डारो ना) बीच बाज़ार
Rang Daalo Na Beech Bazaar Lyrics (Rang Daaro Na) Lyrics
तर्ज (Tune): पारंपरिक होली रसिया (Traditional Holi Rasiya)
रंग डालो ना (डारो ना) बीच बाज़ार, श्याम मैं तो मर जाऊँगी। हाय पकडो ना बईया हमार, कैसे मैं बच पाऊँगी॥ रंग डालो ना......
आज ही पहनी मैंने नई चुनरियाँ, वा पे लग रहे गोटा किनरियाँ। आई करके मैं सोलह शृंगार, कैसे मैं बच पाऊँगी, रंग डालो ना.......
मुख पे मेरे गुलाल मलो ना, बेदरदी मेरे संग चलो ना। हाय खोलो ना घुँघटा हमार, शरम से मैं मर जाऊँगी, रंग डालो ना........
देखो श्याम मेरा घुँघटा खोलो ना, चुप ठारो तुम कछु बोलो ना। मिले नैनों से नैनवा हमार, जीते जी मैं मर जाऊँगी, रंग डालो ना .........
क़ल्ली (अकेली) रह गई गह्वर वन मैं, सखी सहेली मेरी कोई ना संग मैं। हाय तडपे है जियरा हमार, कैसे मैं घर जाऊँगी, रंग डालो ना.......

अर्थ (Bhavarth)
Read the most authentic and complete Rang Daalo Na Beech Bazaar Lyrics (Rang Daaro Na) (रंग डालो ना (डारो ना) बीच बाज़ार) lyrics. Popularized by Sadhvi Purnima Ji, this divine holi rasiya dedicated to Shri Radha-Krishna is presented in pristine Devanagari and English (Romanized) scripts. Using our advanced transliteration tool, you can instantly convert these lyrics into 8+ Indian languages including Gujarati, Bengali, Kannada, and Telugu. Scroll up to read the complete Bhavarth (meaning) to deeply understand the spiritual essence of this composition. You can also use the free PDF download feature to save these lyrics for your daily offline Puja, Aarti, and Satsang.
यहाँ आप रंग डालो ना (डारो ना) बीच बाज़ार के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस होली रसिया को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
Frequently Asked Questions
Q1: 'रंग डालो ना बीच बाज़ार' भजन की सबसे प्रसिद्ध गायिका कौन हैं?
यह सुंदर होली रसिया 'पूनम दीदी' के नाम से मशहूर परम पूज्या साध्वी पूर्णिमा जी (Sadhvi Purnima Ji) द्वारा बहुत ही भावपूर्ण अंदाज़ में गाया गया है।
Q2: ब्रज भाषा में 'रंग डालो ना' को और क्या कहा जाता है?
ब्रज भाषा की मिठास में इसे "रंग डारो ना बीच बाज़ार" (Rang Daaro Na) कहा जाता है। ब्रजवासी अक्सर 'डालो' की जगह 'डारो' शब्द का प्रयोग अधिक प्रेम से करते हैं।
Q3: इस भजन में किस वन (जंगल) का ज़िक्र किया गया है?
इस भजन में बरसाना स्थित पवित्र 'गहवर वन' (Ghevar Van) का ज़िक्र है, जहाँ गोपी अपनी सखियों से बिछड़ कर अकेली रह जाती है और श्याम सुंदर उसे रंग लगाने आ जाते हैं।
Related Tags
Categories: Holi Rasiya, Phalgun Bhajan
Deity: Shri Radha-Krishna
Community Comments (0)
Be the first to share your devotion here.

मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।
Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.