ये रसिया द्वारे आये हैं होली के मज़ा उड़ाले (होली रसिया) लिरिक्स
Ye Rasiya Dware Aaye Hain Holi Ke Maza Udale Lyrics Lyrics
तर्ज (Tune): नैना लगे मुरलिया वारे से
ये रसिया द्वारे आये हैं, होली के मज़ा उड़ाले, होली के मज़ा उड़ाले, नैक मेरो रंग डल वाले।
घर से बाहर आजा गोरी, तो ते बंधी है प्रेम की डोरी। तेरे मन की करने आये हैं, होली के मज़ा उड़ाले॥
ऐसी मारे भर पिचकारी, गोरी ते करदेंगे कारी। देख सही समय पे आये हैं, होली के मज़ा उड़ाले॥
आज नाचले मिल रहो मौका, जीवन को है नाय भरोसा। दो गीत प्यार के गाये हैं, होली के मज़ा उड़ाले॥
ये रसीया तेरे रोज़ न आमें, अपने मन की तोय बतामें। ये रंग केशरिया लाये हैं, होली के मज़ा उड़ाले॥
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अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'ये रसिया द्वारे आये हैं' होली भजन का मुख्य भाव क्या है?
A1: इस भजन में ब्रज के होरियारों (रसिया) द्वारा गोपी के घर आकर उसे प्रेम से बाहर बुलाने और केसरिया रंग के साथ फाल्गुन की होली खेलने का सुंदर और उल्लासपूर्ण आग्रह किया गया है।
Q2: रसिया गोपी से आज ही बाहर आकर नाचने और होली खेलने की ज़िद क्यों कर रहे हैं?
A2: रसिया गोपी को समझाते हैं कि "जीवन को है नाय भरोसा" (जीवन का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब समाप्त हो जाए)। इसलिए जब तक जीवन है और मौका मिला है, तब तक प्रेम और उल्लास के साथ होली खेल लेनी चाहिए।
Q3: रसिया गोपी को रंगने के लिए अपने साथ कौन सा रंग लाए हैं?
A3: भजन के अंतिम पद के अनुसार, रसिया गोपी को रंगने के लिए अपने साथ 'केसरिया' रंग लेकर आए हैं।
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Categories: Phalgun Bhajan, Holi Rasiya, Braj Ras
Deity: Shri Radha-Krishna
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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