Shiv Ji

मसान के राजा (नार्सी) सम्पूर्ण रैप लिरिक्स एवं विस्तृत भावार्थ

Masan Ke Raja Lyrics & Detailed Meaning – Narci (Spiritual Rap) Lyrics

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मसान के राजा (नार्सी) सम्पूर्ण रैप लिरिक्स एवं विस्तृत भावार्थ

MASAN KE RAJA LYRICS DETAILED MEANING NARCI SPIRITUAL RAP

[धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] बोलो नीलकंठेश्वर भगवान की [हुक] चंद्रचूड़ शिवशंकर पार्वती रमणा निनगे नमो नमः चंद्रचूड़ शिवशंकर पार्वती [धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] ये देवों के भी देव हैं, लोग इन्हें कहते… महादेव हैं [नार्सी] मसान वाले बाबा तेरे दास आए काशी ऐसी रास आई काशी, शांति यहीं पाती छाती पैर छुए माटी तेरे, माथे मेरे काफ़ी मेरे प्राण-प्रिय भोले, तोसे माँगूँ मैं एकाकी अभिनाशी मेरा नैना अभिलाषी देखने को तुझे मेरी आँखें कब से प्यासी साथ है कैलाशी तो है काहे की उदासी? कृपा से है घर, प्रेम, जमा धन-राशि आँसू मेरे आँखों के न कोई भी पहचाने किसे समझाऊ हम कैसे हैं दीवाने जी लिए ज़माने, अब स्वयं को बचाने तुझ ही में समाने, चले स्वयं को गँवाने भोले के दीवाने तो हैं हृदय से अघोर दुनिया में वो रह के चले दुनिया पीछे छोड़ भोले आगे बैठा हिस्से हृदय के बटोर एक मेरा सर पापी और उनकी गोद काशी बोलती है, ये नहीं कोई माने नाथ जिसने घाट में एकांत में न काटी रात जिसने भोले से न सांझा करे पश्चाताप जिसने बाँटें नहीं दिल पे लगे सौ आघात जिसने घाटों में न खुद से करी मुलाक़ात जिसने जलते नहीं देखे यहाँ रक्त-मांस जिसने घाटों को न देखा साँस लेते काशी के घाटों से भला कैसे वो करेगा बात? [हुक] चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती रमणा निनगे नमो नमः चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती [धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] ये देवों के भी देव हैं,लोग इन्हें कहते— नमो नमः [नार्सी] जीते जी नहीं देख पाऊ आँख से पर भोले जब छोड़ूँगा मैं साँस ये मेरी काया को जला देना मसान में होली खेल लेना बची हुई राख से वैसे भोले मेरी ये भी न औक़ात है पापी सर पे न रखोगे तुम हाथ ये फिर भी पूछता हूँ देखो लज्जाहीन मैं कैसे पाऊं भला तुझे साक्षात मैं? कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये तुमसे मिलना मेरा बाबा कब से तय था वरना नियति न यहाँ भी पहुँचाती ये काशी आऊँगा मैं, पैर कैसे बाँधोगे? बैठा आस में कि धाम को बुला लोगे एक दिन तेरी काशी ऐसे आऊँगा जब लेटा होऊँगा मैं तो चार कांधों पे मोक्षद्वार मेरा कर रहा इंतज़ार है शिल्पकार मेरे, माँगूँ तोसे बारंबार मेरे रहने हेतु अब नहीं बचा संसार प्राण हरो, कोई तो आके कर दो संस्कार मुझको समझेंगे जो, वो बचे न मानस हैं समझाने का न और भीतर साहस है मेरे गीतों को तो दुनिया बोले नीरस है बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है, महादेव [नार्सी] कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये

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HINDI BHAJAN

[धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] बोलो नीलकंठेश्वर भगवान की

[हुक] चंद्रचूड़ शिवशंकर पार्वती रमणा निनगे नमो नमः चंद्रचूड़ शिवशंकर पार्वती

[धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] ये देवों के भी देव हैं, लोग इन्हें कहते… महादेव हैं

[नार्सी] मसान वाले बाबा तेरे दास आए काशी ऐसी रास आई काशी, शांति यहीं पाती छाती पैर छुए माटी तेरे, माथे मेरे काफ़ी मेरे प्राण-प्रिय भोले, तोसे माँगूँ मैं एकाकी

अभिनाशी मेरा नैना अभिलाषी देखने को तुझे मेरी आँखें कब से प्यासी साथ है कैलाशी तो है काहे की उदासी? कृपा से है घर, प्रेम, जमा धन-राशि

आँसू मेरे आँखों के न कोई भी पहचाने किसे समझाऊ हम कैसे हैं दीवाने जी लिए ज़माने, अब स्वयं को बचाने तुझ ही में समाने, चले स्वयं को गँवाने

भोले के दीवाने तो हैं हृदय से अघोर दुनिया में वो रह के चले दुनिया पीछे छोड़ भोले आगे बैठा हिस्से हृदय के बटोर एक मेरा सर पापी और उनकी गोद

काशी बोलती है, ये नहीं कोई माने नाथ जिसने घाट में एकांत में न काटी रात जिसने भोले से न सांझा करे पश्चाताप जिसने बाँटें नहीं दिल पे लगे सौ आघात

जिसने घाटों में न खुद से करी मुलाक़ात जिसने जलते नहीं देखे यहाँ रक्त-मांस जिसने घाटों को न देखा साँस लेते काशी के घाटों से भला कैसे वो करेगा बात?

[हुक] चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती रमणा निनगे नमो नमः चंद्रचूड़ शिव शंकर पार्वती

[धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री] ये देवों के भी देव हैं,लोग इन्हें कहते—

नमो नमः

[नार्सी] जीते जी नहीं देख पाऊ आँख से पर भोले जब छोड़ूँगा मैं साँस ये मेरी काया को जला देना मसान में होली खेल लेना बची हुई राख से

वैसे भोले मेरी ये भी न औक़ात है पापी सर पे न रखोगे तुम हाथ ये फिर भी पूछता हूँ देखो लज्जाहीन मैं कैसे पाऊं भला तुझे साक्षात मैं?

कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये तुमसे मिलना मेरा बाबा कब से तय था वरना नियति न यहाँ भी पहुँचाती ये

काशी आऊँगा मैं, पैर कैसे बाँधोगे? बैठा आस में कि धाम को बुला लोगे एक दिन तेरी काशी ऐसे आऊँगा जब लेटा होऊँगा मैं तो चार कांधों पे

मोक्षद्वार मेरा कर रहा इंतज़ार है शिल्पकार मेरे, माँगूँ तोसे बारंबार मेरे रहने हेतु अब नहीं बचा संसार प्राण हरो, कोई तो आके कर दो संस्कार

मुझको समझेंगे जो, वो बचे न मानस हैं समझाने का न और भीतर साहस है मेरे गीतों को तो दुनिया बोले नीरस है बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है

बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है, महादेव

[नार्सी] कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये कुछ तो नाता होगा पहला मेरा काशी से तेरी काशी मुझे ऐसे न बुलाती ये

मसान के राजा (नार्सी) सम्पूर्ण रैप लिरिक्स एवं विस्तृत भावार्थ Video

अर्थ (Bhavarth)

यह गीत एक साधारण मनुष्य की आध्यात्मिक यात्रा है, जो दुनिया की भीड़ से टूटकर महादेव के चरणों में और काशी के घाटों पर अपना असली घर ढूँढता है। इस रैप के गहरे भावार्थ को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. काशी के घाटों का सत्य और श्मशान वैराग्य: रैप की शुरुआत में गायक काशी के मणिकर्णिका घाट (मसान) पर शांति का अनुभव करता है। वह कहता है कि जो व्यक्ति कभी घाटों के एकांत में नहीं बैठा, जिसने वहाँ जलते हुए मांस और चिताओं को सांस लेते नहीं देखा, वह कभी काशी के असली रहस्य को नहीं समझ सकता। दुनिया के लिए श्मशान डरावना हो सकता है, लेकिन शिव के दीवाने अघोरी हृदय वाले होते हैं, जो दुनिया को पीछे छोड़कर महादेव की गोद में अपना सिर रख देते हैं। यहाँ जीवन की नश्वरता (मृत्यु) का सीधा सामना होता है। 2. महादेव से पूर्व-जन्म का नाता और पश्चाताप: गायक अपने भीतर झांकता है और खुद को एक पापी, लज्जाहीन इंसान मानता है। वह महादेव से पूछता है कि मेरी कोई औकात नहीं कि आप मेरे सिर पर हाथ रखें, फिर भी मैं आपको साक्षात पाना चाहता हूँ। वह महसूस करता है कि उसका काशी से कोई पिछले जन्म का नाता है, "वरना नियति (किस्मत) मुझे बार-बार यहाँ खींचकर नहीं लाती।" यह एक भक्त का भगवान के सामने पूर्ण आत्म-समर्पण और अपने कर्मों का पश्चाताप है। 3. मोक्ष की अंतिम इच्छा (The Ultimate Surrender): रैप के अंतिम भाग में एक अत्यंत ही भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाली पुकार है। गायक कहता है कि अगर जीते जी मैं आपको नहीं देख पाया, तो कम से कम मरने के बाद मेरी काया को इसी मसान में जलाना और मेरी बची हुई राख से होली खेलना (जैसे भस्म आरती में होता है)। वह उस दिन का इंतज़ार कर रहा है जब वह 'चार कांधों' पर लेटकर हमेशा के लिए काशी आएगा। दुनिया उसे और उसके गीतों को नीरस (Boring/Misunderstood) समझती है; अब उसे समझाने की हिम्मत नहीं बची है। अंत में वह पुकारता है— "बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है महादेव!" अर्थात्, अब इस संसार में मेरा कोई नहीं, केवल आप और आपकी काशी ही मेरा अंतिम सत्य है।

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यहाँ आप मसान के राजा (नार्सी) सम्पूर्ण रैप लिरिक्स एवं विस्तृत भावार्थ के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: 'मसान के राजा' गीत का मुख्य विषय (Theme) क्या है?

A1: यह एक 'आध्यात्मिक रैप' (Spiritual Rap) है। इसका मुख्य विषय भगवान शिव (महादेव) के प्रति पूर्ण समर्पण, काशी (वाराणसी) के घाटों का रहस्य, श्मशान वैराग्य और जीवन-मृत्यु के सत्य को स्वीकार करना है।

Q2: रैप में "बचा तू ही स्वामी, और तेरा बनारस है" का क्या अर्थ है?

A2: यह पंक्ति भौतिक दुनिया (Material World) से गायक की पूर्ण विरक्ति (Detachment) को दर्शाती है। जब इंसान को दुनियावी रिश्तों और लोगों से कोई उम्मीद नहीं रहती, तब उसे केवल महादेव और उनकी पावन नगरी काशी में ही अपना अंतिम आश्रय और शांति दिखाई देती है।

Q3: 'मसान के राजा' रैप का निर्माता और गायक कौन है?

A3: इस अत्यंत गहरे और शक्तिशाली रैप को प्रसिद्ध स्वतंत्र हिप-हॉप आर्टिस्ट नार्सी (Narci) ने लिखा, गाया और प्रोड्यूस किया है। इसमें बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की आवाज़ का भी एक छोटा सा अंश (Sample) इस्तेमाल किया गया है।

Deity: Shiv Ji

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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