केशो में गंगा है माथे पे चांद
Kesho Mein Ganga Hai Maathe Pe Chaand Lyrics
तर्ज (Tune): आने से उसके।
केशो में गंगा है माथे पे चांद, पर्वत पे बैठे वो पीते है भांग, भोला भंडारी है महादेव मेरा, योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा।।
कर भजन तू उसका, वो भक्तों की बिगड़ी बनाते, वो कभी ना हारे, जो भोले की काँवर उठाते, निर्बल का साथी है, सच्चा हितकारी है महादेव मेरा, भोला भंडारी है महादेव मेरा, योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा।।
क्या धरा क्या अंबर, सारे करते है तेरी गुलामी, हर दिशा के प्राणी, भोले शंकर जी है सबके स्वामी, सर्पों की माला है, नंदी की सवारी है महादेव मेरा, योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा।।
ये गगन के तारे, और भानू करे तेरी पूजा, मान ले ‘बिसरिया’ नहीं भोले सा है कोई दूजा, पार करे वो नैया, बड़ा उपकारी है महादेव मेरा, भोला भंडारी है महादेव मेरा, योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा।।
केशो में गंगा है माथे पे चांद, पर्वत पे बैठे वो पीते है भांग, भोला भंडारी है महादेव मेरा, योगी त्रिपुरारी है महादेव मेरा।।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'केशो में गंगा है माथे पे चांद' भजन में भगवान शिव के किस स्वरूप का वर्णन है?
A1: इस भजन में भगवान शिव के उस अलौकिक स्वरूप का वर्णन है जिसमें उनकी जटाओं में माँ गंगा, माथे पर चंद्रमा, गले में सांपों की माला (सर्प माला) और उनकी सवारी के रूप में नंदी बैल मौजूद हैं। वे कैलाश पर्वत पर विराजमान 'त्रिपुरारी' हैं।
Q2: इस शिव भजन में रचयिता का क्या नाम आया है?
A2: भजन की अंतिम पंक्तियों ("मान ले 'बिसरिया' नहीं भोले सा है कोई दूजा") में इस सुंदर गीत के रचयिता/कवि 'बिसरिया' (Bisariya) जी का नाम आया है।
Q3: क्या मैं इस शिव भजन (Kanwar Geet) का PDF डाउनलोड कर सकता हूँ?
A3: जी हाँ! आप इसी पेज पर, लिरिक्स के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' बटन पर क्लिक करके इस ऊर्जावान शिव भजन को अपनी मनपसंद भाषा में बिलकुल मुफ्त में सेव कर सकते हैं।
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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