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दशरथ जी मेरे मरने के बाद (श्रवण कुमार भजन) लिरिक्स

Dashrath Ji Mere Marne Ke Baad Shravan Kumar Bhajan Lyrics Lyrics

Location: बुंदेलखंड

तर्ज (Tune): पंडित जी मेरे मरने के बाद

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दशरथ जी मेरे मरने के बाद (श्रवण कुमार भजन) लिरिक्स

DASHRATH JI MERE MARNE KE BAAD SHRAVAN KUMAR BHAJAN LYRICS

दशरथ जी मेरे मरने के बाद, इतना कष्ट उठा लेना, अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना। इतनी कृपा कर दो राजन फिर से धनुष संभालो तुम, एक बाण से हम दोनों का चीर कलेजा डालो तुम, कहीं प्राण जो अटके तन में, मेरा घोंट गला देना। अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना। गोद लिया जो आपने मुझको, और क्या चाहूं साथ भला, दरस दिया जो अंत समय पर, इतना कर दो नाथ भला, अंतिम इच्छा नाथ यह मेरी, मेरा वंश चला देना। अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना। अंत समय पर आपने लीन्ही, केशव कठिन परीक्षा है, ओ चक्रधारी पूरी कर दो, मेरी अंतिम इच्छा है, 16 कला से पूर्ण कलाधर, ऐसी दिखा कला देना। जहां पे कोई नहीं जला हो, वहां पे मुझे जला देना। दशरथ जी मेरे मरने के बाद, इतना कष्ट उठा लेना, अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना।

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HINDI BHAJAN

दशरथ जी मेरे मरने के बाद, इतना कष्ट उठा लेना, अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना।

इतनी कृपा कर दो राजन फिर से धनुष संभालो तुम, एक बाण से हम दोनों का चीर कलेजा डालो तुम, कहीं प्राण जो अटके तन में, मेरा घोंट गला देना। अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना।

गोद लिया जो आपने मुझको, और क्या चाहूं साथ भला, दरस दिया जो अंत समय पर, इतना कर दो नाथ भला, अंतिम इच्छा नाथ यह मेरी, मेरा वंश चला देना। अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना।

अंत समय पर आपने लीन्ही, केशव कठिन परीक्षा है, ओ चक्रधारी पूरी कर दो, मेरी अंतिम इच्छा है, 16 कला से पूर्ण कलाधर, ऐसी दिखा कला देना। जहां पे कोई नहीं जला हो, वहां पे मुझे जला देना।

दशरथ जी मेरे मरने के बाद, इतना कष्ट उठा लेना, अग्नि देने वाला नहीं कोई, मेरी चिता जला देना।

दशरथ जी मेरे मरने के बाद (श्रवण कुमार भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

यह अत्यंत भावपूर्ण भजन मानव जीवन के दर्द और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की कहानी कहता है। इस भजन में दो अलग-अलग युगों की महाकथाएं गुंथी हुई हैं: पहला भाग (रामायण प्रसंग): जब राजा दशरथ के शब्दभेदी बाण से श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है, तो उसके अंधे और असहाय माता-पिता दशरथ जी से कहते हैं कि अब बुढ़ापे में हमें अग्नि देने वाला कोई पुत्र नहीं बचा है, इसलिए हे राजन! आप ही हमारी चिता जला देना। वे कहते हैं कि आप अपने बाण से हमारा भी कलेजा चीर दीजिए ताकि हम इस पुत्र वियोग के कष्ट से मुक्त हो सकें। दूसरा भाग (महाभारत प्रसंग): यहाँ दानवीर कर्ण मृत्यु शय्या पर भगवान श्रीकृष्ण (केशव) से प्रार्थना कर रहे हैं। श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धरकर कर्ण से अंतिम समय में सोने का दान (कठिन परीक्षा) मांगा था। दर्शन पाने के बाद कर्ण कहते हैं कि 'हे 16 कलाओं के स्वामी चक्रधारी! मेरी अंतिम इच्छा पूरी कर दीजिए। मेरा पूरा जीवन तिरस्कार में बीता है, इसलिए मेरा दाह संस्कार किसी ऐसी कुंवारी भूमि पर करना जहाँ आज तक किसी और की चिता न जली हो।' (मान्यता है कि कर्ण की यह इच्छा पूरी करने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी हथेली पर उनका दाह संस्कार किया था)।

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यहाँ आप दशरथ जी मेरे मरने के बाद (श्रवण कुमार भजन) लिरिक्स के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस चेतावनी भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: 'दशरथ जी मेरे मरने के बाद' भजन में किन दो महाकाव्यों की कथा है?

A1: इस अद्वितीय भजन में रामायण और महाभारत दोनों के प्रसंग हैं। पहले भाग में श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता राजा दशरथ से अपनी चिता जलाने को कह रहे हैं, और दूसरे भाग में दानवीर कर्ण भगवान श्रीकृष्ण से अपनी अंतिम इच्छा पूरी करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

Q2: 'जहां पे कोई नहीं जला हो, वहां पे मुझे जला देना' यह अंतिम इच्छा किसकी थी?

A2: यह दानवीर 'कर्ण' की अंतिम इच्छा थी। उन्होंने मृत्यु शय्या पर भगवान श्रीकृष्ण (केशव) से यह वरदान मांगा था कि उनका अंतिम संस्कार ऐसी पवित्र (कुंवारी) भूमि पर हो जहाँ आज तक किसी का दाह संस्कार न हुआ हो। मान्यता है कि कृष्ण जी ने अपनी हथेली पर उनका संस्कार किया था।

Q3: क्या मैं इस चेतावनी / कथा भजन का PDF डाउनलोड कर सकता हूँ?

A3: जी हाँ! आप इसी पेज पर, लिरिक्स के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' बटन पर क्लिक करके इसे अपनी मनपसंद भाषा में (जैसे हिंदी या English) बिलकुल मुफ्त में सेव कर सकते हैं।

Categories: Chetawani Bhajan, Ramayan Prasang, Filmi Tarz Bhajan

Deity: Shri Ram

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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