रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली (अवधी भजन) लिरिक्स
Raghuvar Sang Khelat Janak Dulari Lyrics (Awadh Holi) Lyrics
तर्ज (Tune): श्री रघुवर कोमल कमल नयन को
रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥
केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत पाग-पगड़िया, केहू के भीजत चोली, अवधपुरी में होली॥
कनक कलश में केसर घोले, कनक कलश में केसर घोले, भर-भर मारत पिचकारी, अवधपुरी में होली॥
उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग की धारी, अवधपुरी में होली॥
जनक लली को मुख रंग डारो, जनक लली को मुख रंग डारो, रंग गए अवध बिहारी, अवधपुरी में होली॥
धन-धन भाग सखी नैनन के, धन-धन भाग सखी नैनन के, निरखत छवि अति प्यारी, अवधपुरी में होली॥
रघुवर संग खेलत जनक दुलारी, अवधपुरी में होली, अवधपुरी में होली॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'रघुवर संग खेलत जनक दुलारी' भजन में किस स्थान की होली का वर्णन है?
इस अत्यंत सुंदर और पारंपरिक लोकगीत में भगवान श्री राम की जन्मभूमि अवधपुरी (अयोध्या) की दिव्य होली का वर्णन किया गया है।
Q2: भजन में "जनक दुलारी" और "अवध बिहारी" किसे कहा गया है?
"जनक दुलारी" (राजा जनक की पुत्री) माता सीता को कहा गया है, और "अवध बिहारी" (अवध में विहार करने वाले राजा) भगवान श्री राम को कहा गया है।
Q3: "कनक कलश में केसर घोले" का क्या अर्थ है?
'कनक' का अर्थ सोना (Gold) होता है। इसका अर्थ है कि अवध के राजमहल में सोने के घड़ों (कलश) में होली खेलने के लिए केसरिया रंग घोला गया है, जिसे श्री राम पिचकारी में भरकर चला रहे हैं।
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Categories: Phalgun Bhajan
Deity: Shri Ram
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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