तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे (लक्खा जी) भजन लिरिक्स
Tere Dar Ko Main Chhod Kahan Jaaun Lyrics (Lakhbir Singh Lakkha) Lyrics
॥ दोहा ॥ चाहे छूट जाए ज़माना, या माल-ओ-ज़र छूटे, ये महल और अटारी, या मेरा घर छूटे। पर कहता है ये लक्खा, ऐ मेरी माता, सब जगत छूटे, पर तेरा न द्वार छूटे॥
तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥
इक आस मुझे तुमसे है मैया, टूटे कहीं न विश्वास मेरा मैया। तेरे सिवा कहाँ झोली फैलाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥
तेरे आगे मैंने दामन पसारा है, मुझको ऐ मैया तेरा ही सहारा है। कहाँ जाऊँ जहाँ जाके कुछ पाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥
‘लक्खा’ आया मैया बन के सवाली है, तेरे दर से गया न कोई खाली है। कैसे दीप मैं निराश होके जाऊं, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥
तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ' भजन के गायक कौन हैं?
माता रानी का यह अत्यंत भावपूर्ण और समर्पण से भरा 'देवी गीत' सुप्रसिद्ध भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी द्वारा गाया गया है।
Q2: भजन के दोहे में प्रयुक्त "माल-ओ-ज़र" का क्या अर्थ है?
'माल-ओ-ज़र' एक उर्दू/फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है— 'धन-दौलत, संपत्ति या सोना-चांदी'। भक्त कह रहा है कि चाहे मेरी सारी दौलत छूट जाए, लेकिन माता का दरबार नहीं छूटना चाहिए।
Q3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक भाव क्या है?
इस भजन का मुख्य भाव 'पूर्ण शरणागति' (Total Surrender) है। जब इंसान सांसारिक रिश्तों और दुनियावी धोखों से निराश हो जाता है, तब उसे केवल ईश्वर (माता रानी) की चौखट ही अपना एकमात्र और सच्चा सहारा दिखाई देती है।
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Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special, Gauri Maa
Deity: Mata Rani
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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