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तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे (लक्खा जी) भजन लिरिक्स

Tere Dar Ko Main Chhod Kahan Jaaun Lyrics (Lakhbir Singh Lakkha) Lyrics

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तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे (लक्खा जी) भजन लिरिक्स

TERE DAR KO MAIN CHHOD KAHAN JAAUN LYRICS LAKHBIR SINGH LAKKHA

॥ दोहा ॥ चाहे छूट जाए ज़माना, या माल-ओ-ज़र छूटे, ये महल और अटारी, या मेरा घर छूटे। पर कहता है ये लक्खा, ऐ मेरी माता, सब जगत छूटे, पर तेरा न द्वार छूटे॥ तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥ इक आस मुझे तुमसे है मैया, टूटे कहीं न विश्वास मेरा मैया। तेरे सिवा कहाँ झोली फैलाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥ तेरे आगे मैंने दामन पसारा है, मुझको ऐ मैया तेरा ही सहारा है। कहाँ जाऊँ जहाँ जाके कुछ पाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥ ‘लक्खा’ आया मैया बन के सवाली है, तेरे दर से गया न कोई खाली है। कैसे दीप मैं निराश होके जाऊं, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥ तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

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HINDI BHAJAN

॥ दोहा ॥ चाहे छूट जाए ज़माना, या माल-ओ-ज़र छूटे, ये महल और अटारी, या मेरा घर छूटे। पर कहता है ये लक्खा, ऐ मेरी माता, सब जगत छूटे, पर तेरा न द्वार छूटे॥

तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

इक आस मुझे तुमसे है मैया, टूटे कहीं न विश्वास मेरा मैया। तेरे सिवा कहाँ झोली फैलाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

तेरे आगे मैंने दामन पसारा है, मुझको ऐ मैया तेरा ही सहारा है। कहाँ जाऊँ जहाँ जाके कुछ पाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

‘लक्खा’ आया मैया बन के सवाली है, तेरे दर से गया न कोई खाली है। कैसे दीप मैं निराश होके जाऊं, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे। अपना दुखड़ा मैं किसको सुनाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे॥

तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, माँ दूजा कोई द्वार न दिखे (लक्खा जी) भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी की अत्यंत दर्द भरी और करुणा से युक्त आवाज़ में गाया गया यह भजन "तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ" पूर्ण शरणागति (Total Surrender) का एक बहुत ही मार्मिक उदाहरण है। जब इंसान दुनिया के हर दरवाजे से निराश हो जाता है, तब उसे केवल माता रानी का ही द्वार दिखाई देता है। इंटरनेट पर सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले 'devi maa ka bhajan' और 'devi geet' की सूची में ऐसे भावपूर्ण भजनों का बहुत ऊँचा स्थान है। यह भेंट भक्त के मन की उस गहरी पीड़ा और अटल विश्वास का वर्णन करती है, जब उसे दुनिया में माता के दरबार के सिवा कोई और आसरा नज़र नहीं आता। यह उन गिने-चुने 'devi maa ke bhajan' में से है जो सीधे आँखों में आंसू ला देते हैं। इसके भावों को तीन चरणों में समझें: 1. दुनियावी मोह-माया का त्याग: भजन की शुरुआत एक बहुत ही शक्तिशाली दोहे से होती है। लक्खा जी कहते हैं कि "चाहे यह पूरा ज़माना (दुनिया) मुझसे रूठ जाए, मेरी सारी धन-दौलत (माल-ओ-ज़र), मेरे बड़े-बड़े महल और मेरा घर भी मुझसे छूट जाए, तो मुझे कोई परवाह नहीं। हे माता! बस इतनी कृपा करना कि मुझसे कभी तुम्हारा यह पवित्र द्वार (चौखट) न छूटे।" भक्त कहता है कि इस स्वार्थी दुनिया में मुझे तुम्हारे सिवा कोई और ऐसा दरवाज़ा नहीं दिखता, जहाँ मैं अपना दुखड़ा (परेशानियां) सुना सकूँ। 2. अटूट आस और फैलाया हुआ दामन: भक्त माता से प्रार्थना करता है कि "हे मैया! मुझे अब केवल तुमसे ही एक आस (उम्मीद) बची है, मेरा यह विश्वास कभी टूटने मत देना।" जब भक्त दुनिया से हार जाता है, तो वह केवल अपनी माँ के आगे ही अपना दामन (झोली) पसारता है। यह 'vaishno devi bhajan' के उस भाव को दर्शाता है जहाँ लाखों भक्त पहाड़ों की कठिन चढ़ाई चढ़कर केवल माँ के दरबार में अपना सहारा ढूंढने जाते हैं। 3. खाली न लौटने का पक्का विश्वास: अंतिम भाग में गीतकार 'दीप' जी और गायक 'लक्खा' जी एक 'सवाली' (भिखारी/याचक) बनकर माता के दरबार में खड़े हैं। उनका यह पक्का विश्वास है कि माता रानी के दरबार से आज तक कोई भी सवाली खाली हाथ नहीं लौटा है। इसलिए वे कहते हैं कि "हे माँ! जब तुम्हारा दरबार इतना दयालु है, तो भला मैं यहाँ से निराश होकर कैसे वापस जा सकता हूँ?"

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Frequently Asked Questions

Q1: 'तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ' भजन के गायक कौन हैं?

माता रानी का यह अत्यंत भावपूर्ण और समर्पण से भरा 'देवी गीत' सुप्रसिद्ध भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) जी द्वारा गाया गया है।

Q2: भजन के दोहे में प्रयुक्त "माल-ओ-ज़र" का क्या अर्थ है?

'माल-ओ-ज़र' एक उर्दू/फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है— 'धन-दौलत, संपत्ति या सोना-चांदी'। भक्त कह रहा है कि चाहे मेरी सारी दौलत छूट जाए, लेकिन माता का दरबार नहीं छूटना चाहिए।

Q3: इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक भाव क्या है?

इस भजन का मुख्य भाव 'पूर्ण शरणागति' (Total Surrender) है। जब इंसान सांसारिक रिश्तों और दुनियावी धोखों से निराश हो जाता है, तब उसे केवल ईश्वर (माता रानी) की चौखट ही अपना एकमात्र और सच्चा सहारा दिखाई देती है।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special, Gauri Maa

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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