Sanatan Gyan 7 Min Read 17 मार्च 2026

चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना मुहूर्त, व्रत नियम और वृंदावन की विशेष पूजा

Chaitra Navratri 2026: Kalash Sthapana Muhurat, Vrat Niyam & Vrindavan Puja

Chaitra Navratri 2026: Kalash Sthapana Muhurat, Vrat Niyam & Vrindavan Puja

जय माता दी! प्रिय भक्तों, यदि आप इंटरनेट पर यह खोज रहे हैं कि 2026 mein navratri kab hai या when is navratri in 2026, तो आप बिल्कुल सही स्थान पर आए हैं। आदिशक्ति माँ भवानी की आराधना का सबसे पवित्र पर्व, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से आरंभ होकर 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) तक मनाया जाएगा। 27 मार्च को ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव 'राम नवमी' के रूप में मनाया जाएगा।

सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इसी दिन से हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत 2083) का शुभारंभ होता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका (Ultimate Guide) में हम आपको chaitra navratri 2026 की तिथियां, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, नवरात्रि के 9 रंग (Navratri Colours 2026), 9 दिनों की पूजा विधि, व्रत के नियम, गुप्त नवरात्रि 2026, राम नवमी 2026 और वृंदावन के सिद्ध कात्यायनी पीठ के अनसुने रहस्यों के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे।

1. चैत्र नवरात्रि 2026: तिथियां और 9 दिनों का संपूर्ण कैलेंडर

नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा) को समर्पित होते हैं। माता रानी को प्रसन्न करने के लिए हर दिन का एक विशेष रंग और विशेष भोग होता है। यहाँ navratri march 2026 की पूरी सूची दी गई है:

  • 19 मार्च 2026 (पहला दिन): माँ शैलपुत्री पूजा (कलश स्थापना)। रंग: पीला, भोग: गाय का शुद्ध घी।
  • 20 मार्च 2026 (दूसरा दिन): माँ ब्रह्मचारिणी पूजा। रंग: हरा, भोग: शक्कर और पंचामृत।
  • 21 मार्च 2026 (तीसरा दिन): माँ चंद्रघंटा पूजा। रंग: ग्रे (स्लेटी), भोग: दूध की मिठाई या खीर।
  • 22 मार्च 2026 (चौथा दिन): माँ कूष्मांडा पूजा। रंग: नारंगी, भोग: मालपुआ।
  • 23 मार्च 2026 (पांचवां दिन): माँ स्कंदमाता पूजा। रंग: सफेद, भोग: केले का फल।
  • 24 मार्च 2026 (छठा दिन): माँ कात्यायनी पूजा। रंग: लाल, भोग: शहद (Honey)।
  • 25 मार्च 2026 (सातवां दिन): माँ कालरात्रि पूजा। रंग: नीला, भोग: गुड़।
  • 26 मार्च 2026 (आठवां दिन): माँ महागौरी — दुर्गा अष्टमी / महाअष्टमी। रंग: गुलाबी, भोग: नारियल।
  • 27 मार्च 2026 (नौवां दिन): माँ सिद्धिदात्री — महानवमी और राम नवमी। रंग: जामुनी, भोग: हलवा, चना और पूड़ी।

2. नवरात्रि 2026 के 9 रंग: तारीख और देवी के अनुसार संपूर्ण सूची (Navratri Colours 2026 with Date)

नवरात्रि में हर दिन एक विशेष रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। यह परंपरा माता के उस दिन के स्वरूप से जुड़ी होती है और भक्त को उस देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नीचे navratri 2026 colours with date की पूरी और अधिकृत सूची दी गई है:

  • दिन 1 — 19 मार्च 2026 — माँ शैलपुत्री — रंग: 🟡 पीला (Yellow): पीला रंग उत्साह, ऊर्जा और प्रसन्नता का प्रतीक है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री की कृपा पाने के लिए पीले रंग के वस्त्र पहनें।
  • दिन 2 — 20 मार्च 2026 — माँ ब्रह्मचारिणी — रंग: 🟢 हरा (Green): हरा रंग प्रकृति, विकास और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह दिन तपस्या और साधना को समर्पित है।
  • दिन 3 — 21 मार्च 2026 — माँ चंद्रघंटा — रंग: ⚫ ग्रे / स्लेटी (Grey): ग्रे रंग शक्ति और बुराई के नाश का प्रतीक है। माँ चंद्रघंटा महिषासुर का नाश करने वाली हैं।
  • दिन 4 — 22 मार्च 2026 — माँ कूष्मांडा — रंग: 🟠 नारंगी (Orange): नारंगी रंग रचनात्मकता और साहस का प्रतीक है। माँ कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।
  • दिन 5 — 23 मार्च 2026 — माँ स्कंदमाता — रंग: ⚪ सफेद (White): सफेद रंग पवित्रता, शांति और निर्मलता का प्रतीक है। स्कंद (कार्तिकेय) की माता का यह दिन विशेष रूप से पुत्र सुख के लिए पूजा जाता है।
  • दिन 6 — 24 मार्च 2026 — माँ कात्यायनी — रंग: 🔴 लाल (Red): लाल रंग प्रेम, शक्ति और विजय का प्रतीक है। विवाह और सौभाग्य की कामना के लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
  • दिन 7 — 25 मार्च 2026 — माँ कालरात्रि — रंग: 🔵 नीला (Blue): नीला रंग विशाल ब्रह्मांड और गहराई का प्रतीक है। काल (मृत्यु) की भी रात्रि — माँ कालरात्रि समस्त भयों का नाश करती हैं।
  • दिन 8 — 26 मार्च 2026 — माँ महागौरी — रंग: 🩷 गुलाबी (Pink): गुलाबी रंग करुणा और सौम्यता का प्रतीक है। महाअष्टमी पर माँ महागौरी की विशेष पूजा और कन्या पूजन होता है।
  • दिन 9 — 27 मार्च 2026 — माँ सिद्धिदात्री — रंग: 🟣 जामुनी / बैंगनी (Purple): जामुनी रंग ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। महानवमी और राम नवमी एक साथ होने से यह दिन अत्यंत शुभ है।

💡 जरूरी टिप्स (Navratri Colour Tips): यदि किसी दिन विशेष रंग के वस्त्र उपलब्ध न हों, तो उस रंग की चुनरी, दुपट्टा या कलाई पर धागा बाँधना भी उतना ही शुभ माना जाता है। मुख्य भावना श्रद्धा और समर्पण की होनी चाहिए।

3. कलश स्थापना (घटस्थापना) मुहूर्त और संपूर्ण विधि

नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण चरण 'कलश स्थापना' है। navratri sthapana muhurat 2026 पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि सही मुहूर्त में स्थापित कलश पूरे वर्ष घर में धन-धान्य और सुख-शांति बनाए रखता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (19 मार्च 2026)

प्रतिपदा तिथि 18 मार्च की रात से ही लग जाएगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार कलश स्थापना 19 मार्च की सुबह की जाएगी।

  • प्रातःकालीन उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:20 से 08:30 तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (दोपहर): सुबह 11:45 से दोपहर 12:35 तक (यह समय पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है)।

घटस्थापना की सामग्री और विधि (Step-by-Step)

  1. सामग्री: मिट्टी का एक बड़ा पात्र (जौ बोने के लिए), शुद्ध मिट्टी, जौ (Barley), तांबे या मिट्टी का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के 5 पत्ते, साबुत सुपारी, सिक्का, अक्षत (साबुत चावल), लाल कलावा (मौली), और लाल चुनरी में लिपटा हुआ एक जटा वाला नारियल।
  2. विधि: स्नान के बाद घर के ईशान कोण (North-East) को साफ करें। वहां एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  3. मिट्टी के पात्र में थोड़ी मिट्टी डालें और उसमें जौ बो दें। इसके ऊपर कलश रखें।
  4. कलश में गंगाजल, शुद्ध जल, एक सिक्का, सुपारी और थोड़ा सा इत्र डालें। कलश के मुख पर कलावा बांधें।
  5. कलश के ऊपर आम के 5 पत्ते रखें और उनके बीच में लाल चुनरी से लिपटा हुआ नारियल (जिसका मुख आपकी ओर हो) स्थापित करें।
  6. माता का ध्यान करते हुए नवार्ण मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" का जाप करें और अखंड ज्योत प्रज्वलित करें।

4. वृंदावन दर्शन: चैत्र नवरात्रि में शक्ति और भक्ति का महासंगम

आमतौर पर लोग वृंदावन को केवल भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी की लीला भूमि के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि chaitra navratri के दौरान वृंदावन एक जाग्रत शक्तिपीठ बन जाता है? यहाँ कृष्ण-भक्ति और देवी-शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

वृंदावन का कात्यायनी पीठ (Katyayani Peeth)

वृंदावन के रंगनाथ मंदिर के समीप स्थित 'कात्यायनी पीठ' माता के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, द्वापर युग में जब गोपियां भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं, तब उन्होंने यमुना किनारे चीरघाट पर माता कात्यायनी की ही बालू (रेत) से प्रतिमा बनाकर घोर तपस्या की थी।

"कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥"

नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान: आज भी नवरात्रि के छठे दिन (माँ कात्यायनी के दिन) यहाँ कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए विशेष पूजा करने देश-विदेश से आती हैं। 19 से 27 मार्च 2026 के बीच यहाँ महा-आरती, छप्पन भोग और रासलीला का भव्य आयोजन होगा।

5. नवरात्रि व्रत के कड़े नियम: क्या खाएं और क्या न खाएं?

नवरात्रि का व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर (Body Detoxing) और मन की शुद्धि का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीका है।

क्या खा सकते हैं? (Phalahar Diet)

  • सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, राजगिरा और सामक के चावल (Samak Rice)।
  • साबूदाने की खिचड़ी, खीर या वड़ा।
  • मखाना, मूंगफली, आलू, शकरकंद, और कच्चा केला।
  • दूध, दही, छाछ, पनीर, घी और सभी प्रकार के ताजे फल।
  • नमक में केवल सेंधा नमक (Rock Salt) का प्रयोग करें।

क्या बिल्कुल न खाएं? (Strict Avoidance)

  • गेहूं, चावल, सूजी, बेसन या कोई भी साधारण अनाज।
  • सादा (समुद्री) नमक, हल्दी, और बाजार के पैकेटबंद मसाले।
  • प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा और अंडे का पूर्णतः त्याग करें।
  • व्रत का भोजन पकाने के लिए रिफाइंड तेल का इस्तेमाल न करें, केवल शुद्ध देसी घी या मूंगफली के तेल का उपयोग करें।

अन्य महत्वपूर्ण नियम (Lifestyle Rules)

व्रती (व्रत रखने वाले) को 9 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। बाल कटवाना, दाढ़ी या नाखून काटना इन 9 दिनों में वर्जित माना जाता है। दिन के समय सोने से बचें और अधिक से अधिक समय माता के भजनों या दुर्गा सप्तशती के पाठ में व्यतीत करें।

6. दुर्गा अष्टमी 2026: तिथि, मुहूर्त और महत्व (Navratri Ashtami 2026)

नवरात्रि में सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्रश्न यह होता है — navratri ashtami 2026 kab hai? तो उत्तर है: वर्ष 2026 में दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी) 26 मार्च 2026, गुरुवार को है। यह चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन है जब माँ महागौरी की पूजा होती है।

महाअष्टमी का क्या महत्व है?

अष्टमी तिथि को माँ दुर्गा के उस स्वरूप की पूजा होती है जिसने महिषासुर का वध करने के लिए सबसे उग्र रूप धारण किया था। शास्त्रों के अनुसार, अष्टमी के दिन जो भी मनुष्य विधि-विधान से देवी की उपासना करता है, उसे सुख, धन, पुत्र और मोक्ष — ये चारों फल एक साथ प्राप्त होते हैं।

महाअष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त (26 मार्च 2026)

  • प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त: सुबह 06:15 से 08:45 तक।
  • संधि पूजा का समय: अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में — रात लगभग 11:45 से 12:33 के बीच। यह 48 मिनट का समय 'संधि पूजा' के लिए विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है।

अष्टमी के दिन क्या करें? (Step-by-Step)

  1. प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
  2. माँ महागौरी को सफेद रंग का भोग अर्पित करें — नारियल, सफेद मिठाई या दूध की खीर।
  3. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या माँ की आरती करें।
  4. कन्या पूजन का आयोजन करें (विस्तृत विधि नीचे देखें)।
  5. संधि काल में दीप प्रज्वलित करें और घर में उपस्थित समस्त परिवार को एकत्र करके माँ की आरती उतारें।

7. कन्या पूजन विधि (दुर्गा अष्टमी और नवमी)

चैत्र नवरात्रि का पूर्ण फल कन्या पूजन के बिना नहीं मिलता। वर्ष 2026 में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च (गुरुवार) को और महा नवमी 27 मार्च (शुक्रवार) को है। इन दोनों में से किसी भी दिन आप कन्या पूजन कर सकते हैं।

  1. 2 से 10 वर्ष तक की 9 कन्याओं और एक बालक (जिसे भैरव या लांगुरिया का रूप माना जाता है) को आदरपूर्वक घर बुलाएं।
  2. प्रवेश करते ही उनके चरण स्वच्छ जल से धोएं और कुमकुम का तिलक लगाएं।
  3. उन्हें स्वच्छ आसन पर बिठाकर माता का प्रिय प्रसाद — काले चने, हलवा और पूड़ी खिलाएं।
  4. भोजन के पश्चात अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें लाल चुनरी, फल, और दक्षिणा (भेंट) दें।
  5. अंत में सभी कन्याओं के चरण स्पर्श करके माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें।

8. राम नवमी 2026: तिथि, मुहूर्त और इस वर्ष का विशेष संयोग (Ram Navami 2026)

वर्ष 2026 में राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को है। यह तिथि दो कारणों से अत्यंत विशेष है — पहला, इसी दिन चैत्र नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन (महानवमी) भी है। दूसरा, शुक्रवार को माँ लक्ष्मी का दिन माना जाता है, इसलिए इस राम नवमी पर शक्ति और वैभव — दोनों का दिव्य संयोग बन रहा है।

राम नवमी 2026 का शुभ मुहूर्त (Ram Navami Puja Muhurat)

  • राम जन्म मुहूर्त: दोपहर 11:15 से दोपहर 1:45 तक (यह अभिजीत मुहूर्त है — भगवान श्रीराम का जन्म ठीक मध्याह्न में हुआ था)।
  • पूजा का सर्वोत्तम समय: सुबह 11:00 से दोपहर 12:30 तक।

राम नवमी की पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें (पीला रंग श्रीराम को प्रिय है)।
  2. घर में स्थापित श्रीराम की प्रतिमा या चित्र को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर जल से शुद्ध करें।
  3. भगवान को पीले फूल, पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू या केसर की खीर), तुलसी दल और पान अर्पित करें।
  4. रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करें या श्रीराम रक्षा स्तोत्र का जाप करें।
  5. मध्याह्न में (दोपहर 12 बजे के आसपास) भगवान श्रीराम के 'जन्म' की घड़ी पर शंख बजाएं, आरती करें और मिष्ठान का प्रसाद वितरित करें।

महानवमी और राम नवमी: एक साथ दो पर्व क्यों?

यह दुर्लभ संयोग इसलिए होता है क्योंकि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को ही महानवमी (माँ सिद्धिदात्री की पूजा का दिन) और राम नवमी (भगवान श्रीराम का जन्मदिन) — दोनों मनाए जाते हैं। सनातन परंपरा में यह माना जाता है कि भगवान श्रीराम स्वयं आदिशक्ति के परम भक्त थे और उन्होंने लंका विजय से पहले नवरात्रि में माँ भगवती की आराधना की थी। इसलिए माँ सिद्धिदात्री के आशीर्वाद के साथ प्रभु राम का जन्म — इस तिथि को 'सिद्धि का दिन' बना देता है।

9. गुप्त नवरात्रि 2026: तिथियां, महत्व और तांत्रिक साधना का रहस्य

बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदू धर्म में वर्ष में चार नवरात्रियां होती हैं — चैत्र, शारदीय (आश्विन), और दो गुप्त नवरात्रि। गुप्त नवरात्री का मतलब है वे नवरात्रियां जो सामान्य जनमानस में प्रचलित नहीं हैं लेकिन तांत्रिक साधकों, योगियों और उपासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं।

गुप्त नवरात्रि 2026 की तिथियां (Gupt Navratri 2026 Dates)

  • आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक — जुलाई 2026 में (लगभग 17 जुलाई से 25 जुलाई 2026 के आसपास। सटीक तिथि के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग का अनुसरण करें)।
  • माघ गुप्त नवरात्रि 2026: माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक — जनवरी-फरवरी 2026 में (यह पहले ही बीत चुकी है — अगली माघ गुप्त नवरात्रि जनवरी-फरवरी 2027 में होगी)।

गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की पूजा होती है?

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में नवदुर्गा की पूजा होती है, जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं (Dus Mahavidya) की उपासना की जाती है। ये दस महाशक्तियां हैं — काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी (त्रिपुर सुंदरी), भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।

गुप्त नवरात्रि 'गुप्त' क्यों कहलाती है?

यह नवरात्रि इसलिए 'गुप्त' कहलाती है क्योंकि इसमें की जाने वाली साधनाएं तंत्र शास्त्र के अनुसार गुप्त (Secret) रखी जाती हैं। सामान्य लोग इन साधनाओं के बारे में नहीं जानते। परंपरागत रूप से गुरु-शिष्य परंपरा में ही इन दस महाविद्याओं की साधना का ज्ञान दिया जाता है। इस दौरान होने वाले हवन, तंत्र-मंत्र अनुष्ठान आदि गुप्त रूप से किए जाते हैं इसीलिए यह 'गुप्त नवरात्रि' कहलाती है।

सामान्य गृहस्थ गुप्त नवरात्रि में क्या करें?

  • गुप्त नवरात्रि में माँ काली और माँ बगलामुखी की विशेष उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • घर में गुड़ और घी से हवन करें और माँ काली का मंत्र "ॐ क्रीं काली" का 108 बार जाप करें।
  • किसी तांत्रिक साधना में बिना गुरु के प्रयास न करें — सामान्य पूजा-पाठ पर्याप्त है।
  • इस दौरान किया गया दान, विशेषकर काले तिल और सरसों का तेल, अत्यंत पुण्यकारी होता है।

10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. 2026 में नवरात्रि कब से शुरू हो रही है? (Navratri 2026 Date)
उत्तर: वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रही हैं और इसका समापन 27 मार्च 2026 को राम नवमी के दिन होगा।
Q2. नवरात्रि 2026 के 9 रंग कौन से हैं? (Navratri Colours 2026)
उत्तर: नवरात्रि 2026 के 9 रंग क्रमशः हैं — पीला, हरा, ग्रे, नारंगी, सफेद, लाल, नीला, गुलाबी और जामुनी। प्रत्येक रंग उस दिन की देवी और उनके स्वरूप का प्रतीक है। विस्तृत सूची ऊपर 'नवरात्रि 2026 के 9 रंग' वाले खंड में देखें।
Q3. दुर्गा अष्टमी 2026 कब है? (Navratri Ashtami 2026 Date)
उत्तर: दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी) 26 मार्च 2026, गुरुवार को है। इसी दिन कन्या पूजन का आयोजन करना चाहिए। अगले दिन 27 मार्च को महानवमी और राम नवमी है।
Q4. राम नवमी 2026 कब है? (Ram Navami 2026 Date)
उत्तर: राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को है। इस वर्ष यह महानवमी के साथ पड़ रही है। भगवान श्रीराम के जन्म का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:15 से 1:45 के बीच है।
Q5. गुप्त नवरात्रि 2026 कब है? (Gupt Navratri 2026)
उत्तर: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 जुलाई 2026 (लगभग 17 से 25 जुलाई) में है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की उपासना होती है। इसे 'गुप्त' इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें की जाने वाली तांत्रिक साधनाएं गुरु-शिष्य परंपरा में गुप्त रखी जाती हैं।
Q6. मैं पूरे 9 दिन का व्रत नहीं रख सकता, तो क्या करूँ?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, यदि शारीरिक कारणों या नौकरी के कारण आप 9 दिन का व्रत नहीं रख सकते, तो आप जोड़ा व्रत रख सकते हैं। इसमें पहले दिन (प्रतिपदा) और आठवें दिन (अष्टमी) का व्रत रखा जाता है। इससे भी संपूर्ण नवरात्रि व्रत का फल प्राप्त होता है।
Q7. कलश स्थापना में जौ (Barley) क्यों बोए जाते हैं?
उत्तर: जौ को सृष्टि की पहली फसल माना जाता है। मान्यता है कि कलश स्थापना के समय बोए गए जौ (जिन्हें खेतड़ी भी कहा जाता है) 9 दिनों में जितनी तेजी से और हरे-भरे बढ़ते हैं, उस घर में उतनी ही अधिक सुख, समृद्धि और हरियाली आती है।
Q8. शीघ्र विवाह के लिए नवरात्रि में कौन सा उपाय करें?
उत्तर: नवरात्रि के छठे दिन (माँ कात्यायनी के दिन — 24 मार्च 2026) पीले वस्त्र पहनकर माता को हल्दी की 3 गांठें, पीले फूल और शहद अर्पित करें। साथ ही "कात्यायनि महामाये..." मंत्र का 108 बार जाप करें। यह उपाय विशेषकर कुंवारी कन्याओं के लिए अचूक माना गया है।
Q9. नवरात्रि के व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं?
उत्तर: जी हाँ, नवरात्रि का व्रत करवा चौथ या निर्जला एकादशी की तरह 'निर्जला' नहीं होता। आप अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार पानी, नींबू पानी, नारियल पानी और जूस पी सकते हैं।
Q10. नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है?
उत्तर: चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल में हिंदू नव वर्ष की शुरुआत के साथ आती है और उत्तर भारत में विशेष रूप से मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि अक्टूबर में आश्विन मास में आती है और इसे दुर्गा पूजा के रूप में पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। दोनों में देवियों की पूजा होती है, लेकिन शारदीय नवरात्रि अधिक सार्वजनिक और उत्सव-प्रधान होती है।

"सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥"

माता आदिशक्ति की कृपा आप और आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे। जय माता दी!

Written & Verified By

Mohit Tarkar
Verified Publisher
प्रमाणित प्रकाशक | Verified Publisher

मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

धार्मिक सटीकता और भाषाई शुद्धता के लिए प्रमाणित। प्रामाणिक सनातन धर्म साहित्य के संरक्षण के लिए समर्पित।

Fact-checked for religious accuracy and linguistic purity. Dedicated to preserving authentic Sanatan Dharma literature.