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जय कात्यायनी माता (नवरात्रि छठा दिन) आरती लिरिक्स

Jai Katyayani Mata Aarti Lyrics (Navratri Day 6) Lyrics

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जय कात्यायनी माता (नवरात्रि छठा दिन) आरती लिरिक्स

JAI KATYAYANI MATA AARTI LYRICS NAVRATRI DAY 6

जय कात्यायनी माता, जय कात्यायनी माता सुख सृष्टि में पाए, जो तुमको ध्याता। जय कात्यायनी माता। आदि अनादि अनामय, अविचल अविनाशी, अटल अनंत अगोचर, अज आनंद राशि। जय कात्यायनी माता। लाल ध्वजा नभ चूमत, मंदिर पे तेरे, जगमग ज्योति माँ जगती, भक्त रहें घेरे। जय कात्यायनी माता। केशत चित्त सुखदायी, शुद्ध ब्रह्मरूपा, सत्य सनातन सुंदर, शक्ति स्वरूपा। जय कात्यायनी माता। दंष्ट्र दानव दुर्गा, नाना शस्त्र धरा, अष्टमातृका योगिनी, नव-नव रूप धरा। जय कात्यायनी माता। महिषासुर संहारिणी, दुर्गुण सभी हरो, दोष-विकार मिटाकर, पावन हमें करो। जय कात्यायनी माता। छठे नवरात्रे को जो पूजे तुम्हें माई, उसने दयामयी माँ, तेरी कृपा पाई। जय कात्यायनी माता। हम अति दीन दुखी हैं, कृपा ज़रा करिए, हैं माँ दोष बहुत पर, आप न ध्यान धरिए। जय कात्यायनी माता। हे कात्यायनी मैया, आरती तेरी गाते, न धन चाहें न सोना, प्यार तेरा चाहते। जय कात्यायनी माता। जय कात्यायनी माता, जय कात्यायनी माता॥

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जय कात्यायनी माता, जय कात्यायनी माता सुख सृष्टि में पाए, जो तुमको ध्याता। जय कात्यायनी माता।

आदि अनादि अनामय, अविचल अविनाशी, अटल अनंत अगोचर, अज आनंद राशि। जय कात्यायनी माता।

लाल ध्वजा नभ चूमत, मंदिर पे तेरे, जगमग ज्योति माँ जगती, भक्त रहें घेरे। जय कात्यायनी माता।

केशत चित्त सुखदायी, शुद्ध ब्रह्मरूपा, सत्य सनातन सुंदर, शक्ति स्वरूपा। जय कात्यायनी माता।

दंष्ट्र दानव दुर्गा, नाना शस्त्र धरा, अष्टमातृका योगिनी, नव-नव रूप धरा। जय कात्यायनी माता।

महिषासुर संहारिणी, दुर्गुण सभी हरो, दोष-विकार मिटाकर, पावन हमें करो। जय कात्यायनी माता।

छठे नवरात्रे को जो पूजे तुम्हें माई, उसने दयामयी माँ, तेरी कृपा पाई। जय कात्यायनी माता।

हम अति दीन दुखी हैं, कृपा ज़रा करिए, हैं माँ दोष बहुत पर, आप न ध्यान धरिए। जय कात्यायनी माता।

हे कात्यायनी मैया, आरती तेरी गाते, न धन चाहें न सोना, प्यार तेरा चाहते। जय कात्यायनी माता। जय कात्यायनी माता, जय कात्यायनी माता॥

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अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह आरती माँ कात्यायनी के अत्यंत भव्य, शक्ति-संपन्न और दयालु स्वरूप का वंदन है: 1. आदि-शक्ति का अविनाशी स्वरूप: आरती की शुरुआत में बताया गया है कि जो भी भक्त माँ कात्यायनी का ध्यान करता है, वह इस सृष्टि में परम सुख को प्राप्त करता है। माता का स्वरूप आदि (शुरुआत), अनादि (जिसका कोई आरंभ न हो), अविनाशी (जो कभी नष्ट न हो), और अगोचर (जो साधारण आँखों से न दिखे) है। माता आनंद की सबसे बड़ी राशि (भंडार) हैं। उनके भव्य मंदिर पर लाल ध्वजा (झंडा) आकाश को चूम रही है और अखंड ज्योति जगमगा रही है। 2. महिषासुर मर्दिनी और दुर्गुणों का नाश: माता शुद्ध ब्रह्मरूपा और सत्य सनातन हैं। उन्होंने दानवों का नाश करने के लिए कई प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हैं। भक्त प्रार्थना करता है कि "हे महिषासुर (भैंसे रूपी राक्षस) का संहार करने वाली माँ! हमारे भीतर के सभी दुर्गुणों, दोषों और विकारों (बुराइयों) को मिटाकर हमें पावन (पवित्र) कर दो।" 3. छठा नवरात्र और निष्काम प्रेम: नवरात्रि के छठे दिन जो भी भक्त माता कात्यायनी को पूजता है, उसे माता की असीम कृपा प्राप्त होती है। भक्त बड़ी ही विनम्रता से कहता है कि "हे माँ! हम बहुत दीन और दुखी हैं, हमारे भीतर बहुत से दोष हैं, पर आप उन पर ध्यान मत दीजिए (उन्हें क्षमा कर दीजिए)।" अंत में भक्त निष्काम भक्ति का परिचय देते हुए कहता है कि "हे मैया, हम आपकी आरती गाते हैं; हमें इस दुनिया का कोई धन या सोना नहीं चाहिए, हमें तो बस आपका प्यार और आशीर्वाद चाहिए।"

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Frequently Asked Questions

Q1: "जय कात्यायनी माता" आरती किस दिन विशेष रूप से गाई जाती है?

A1: यह अत्यंत शुभ और शक्तिशाली आरती नवरात्रि के छठे दिन (षष्ठी तिथि) पर नवदुर्गा के छठे स्वरूप— 'माँ कात्यायनी' की पूजा और आराधना के दौरान गाई जाती है।

Q2: माता को 'कात्यायनी' नाम क्यों दिया गया?

A2: पौराणिक कथाओं के अनुसार, विश्वप्रसिद्ध महर्षि 'कात्यायन' ने भगवती जगदम्बा की अत्यंत कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि माता उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माता ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की, इसीलिए इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा।

Q3: आरती में "न धन चाहें न सोना, प्यार तेरा चाहते" का क्या आध्यात्मिक भाव है?

A3: यह 'निष्काम भक्ति' (Selfless Devotion) का सर्वोच्च उदाहरण है। भक्त माता से कह रहा है कि हे माँ, मुझे इस नाशवान संसार का कोई भी भौतिक सुख, धन या संपत्ति नहीं चाहिए। मुझे केवल आपके श्रीचरणों का सच्चा प्यार और आपकी भक्ति चाहिए।

Categories: Navratri Special, Aarti, Mata Ke Bhajan

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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