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श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स

Shyam Jaisa Nagina Nahi Saare Jag Ki Bajariya Mein Lyrics Lyrics

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श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स

SHYAM JAISA NAGINA NAHI SAARE JAG KI BAJARIYA MEIN LYRICS

श्याम जैसा नगीना नहीं, सारे जग की बजरिया में | नीलमणि ही जडाऊँगी, अपने मन की मुंदरिया में | श्याम का नाम प्यारा लगे, रसना पे बिठाऊंगी मैं, मृदु मूरत बसाउंगी, नैनों की उतरिया में | हैं झूठे सभी रिश्ते, और झूठे सभी नाते, दूजा रंग न चढाऊंगी, अपनी श्यामल चदरिया में | जल्दी से जतन करके, कान्हा को रिझाना है, कुछ दिन ही तो रहना है, काया की कुठरिया में |

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HINDI BHAJAN

श्याम जैसा नगीना नहीं, सारे जग की बजरिया में | नीलमणि ही जडाऊँगी, अपने मन की मुंदरिया में |

श्याम का नाम प्यारा लगे, रसना पे बिठाऊंगी मैं, मृदु मूरत बसाउंगी, नैनों की उतरिया में |

हैं झूठे सभी रिश्ते, और झूठे सभी नाते, दूजा रंग न चढाऊंगी, अपनी श्यामल चदरिया में |

जल्दी से जतन करके, कान्हा को रिझाना है, कुछ दिन ही तो रहना है, काया की कुठरिया में |

श्याम जैसा नगीना नहीं सारे जग की बजरिया में (कृष्ण भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

परम श्रद्धेय रसिक संत बाबा श्री चित्र विचित्र बिहारी दास जी महाराज की मधुर और भावपूर्ण आवाज़ में गाया गया यह कृष्ण भजन भक्तों के हृदय को मोह लेने वाला है। इस भजन में दुनिया की नश्वरता (Temporary nature of the world) और भगवान श्याम के नाम की अमूल्य महिमा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन भगवान श्री कृष्ण (श्याम) के प्रति अनन्य प्रेम और संसार से वैराग्य (Detachment) का एक अत्यंत ही सुंदर मिश्रण है। इसे तीन मुख्य आध्यात्मिक भावों में समझा जा सकता है: 1. श्याम नाम की अमूल्य महिमा (The Supreme Value of Lord Krishna): भक्त कहता है कि इस पूरे संसार रूपी बाज़ार (बजरिया) में भगवान 'श्याम' के नाम जैसा कोई दूसरा अनमोल नगीना (रत्न) नहीं है। भक्त अपने मन को एक अंगूठी (मुंदरिया) मानता है और कहता है कि वह इस अंगूठी में केवल श्याम रूपी 'नीलमणि' (नीले रंग का अनमोल रत्न) ही जड़वाएगा। भक्त भगवान के नाम को अपनी जीभ (रसना) पर बिठाना चाहता है और उनकी कोमल, मनमोहक मूरत को हमेशा के लिए अपनी आँखों में बसा लेना चाहता है। 2. संसार के झूठे रिश्ते (Detachment from Worldly Ties): दूसरे भाग में जीवन की एक बहुत बड़ी सच्चाई बताई गई है। इस दुनिया के जितने भी रिश्ते-नाते हैं, वे सब झूठे और स्वार्थ से भरे हैं। इसलिए भक्त कहता है कि जब मैंने अपने जीवन की चादर (आत्मा) को 'श्याम रंग' में रंग लिया है, तो अब मैं इस पर दुनिया के मोह-माया का कोई दूसरा रंग नहीं चढ़ने दूँगा। यह पूर्ण समर्पण का भाव है जहाँ भक्त केवल कृष्ण का होकर रहना चाहता है। 3. जीवन की क्षणभंगुरता (The Shortness of Life): अंतिम पंक्तियों में शरीर और जीवन की सच्चाई (नश्वरता) का वर्णन है। भक्त अपने आप को समझाता है कि इस शरीर रूपी छोटी सी कोठरी (काया की कुठरिया) में हमें केवल कुछ ही दिनों के लिए रहना है (यानी जीवन बहुत छोटा है)। इसलिए, बिना समय बर्बाद किए, हमें जल्दी से ऐसा कोई जतन (प्रयास) करना चाहिए जिससे हम अपने कान्हा (ईश्वर) को प्रसन्न (रिझा) सकें और मोक्ष प्राप्त कर सकें।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'श्याम जैसा नगीना नहीं' भजन के मूल गायक कौन हैं?

A1: यह अत्यंत मधुर और वैराग्य से भरा भजन परम श्रद्धेय रसिक संत बाबा श्री चित्र विचित्र बिहारी दास जी महाराज द्वारा गाया गया है। इनकी आवाज़ में यह भजन श्रोताओं को बहुत भावुक कर देता है।

Q2: भजन में प्रयुक्त शब्द "काया की कुठरिया" का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

A2: 'काया' का अर्थ है शरीर और 'कुठरिया' का अर्थ है छोटी सी कोठरी या कमरा। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य का शरीर एक अस्थायी (Temporary) घर है जिसमें आत्मा केवल कुछ समय (एक जीवनकाल) के लिए ही रहती है। इसलिए इस छोटे से जीवन में ईश्वर की भक्ति कर लेनी चाहिए।

Q3: "नीलमणि ही जडाऊँगी" पंक्ति में 'नीलमणि' किसे कहा गया है?

A3: यहाँ 'नीलमणि' (नीले रंग का बहुमूल्य रत्न) साक्षात् भगवान श्री कृष्ण को कहा गया है, क्योंकि उनका स्वरूप श्यामल (नीला/सांवला) है और वे संसार के सबसे अनमोल रत्न हैं।

Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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