Shri KrishnaKrishna BhajanBraj Ras

ओ पकड़ो पकड़ो रे सांवरिया मेरो हाथ (तेजवीर सिंह) ब्रज भजन लिरिक्स

O Pakdo Pakdo Re Sanwariya Mero Hath Lyrics (Tejveer Singh) Lyrics

Location: Sonkh, Magorra (Mathura)

तर्ज (Tune): तेने अब तक न चुकायो बेइमान किरायो काया कुटिया को

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

ओ पकड़ो पकड़ो रे सांवरिया मेरो हाथ (तेजवीर सिंह) ब्रज भजन लिरिक्स

O PAKDO PAKDO RE SANWARIYA MERO HATH TEJVEER SINGH LYRICS

ओ पकड़ो पकड़ो रे सांवरिया मेरो हाथ, भँवर में नैया डोल रही, हे जी पकड़ो पकड़ो रे, हाँ जी पकड़ो पकड़ो रे, ओहो पकड़ो पकड़ो रे कन्हैया मेरो हाथ, भँवर में नैया डोल रही | बड़े भाग्य जब होय हमारे, दर्शन देवें आप, सेवा तेरी ऐसी करूँगो, मिट जाएँ सारे पाप, ओ सीधी-सीधी सी कह दऊँ मैं तुमसे बात, भँवर में नैया डोल रही | न तुम देखो ऊँच-नीच कूँ, ना तुम देखो जात, भरी सभा में द्रौपदी टेरी, रख लयी बाकी बात | ओ देदो-देदो रे सुदामा सी सौगात, भँवर में नैया डोल रही | अपने बारे में मैं बताऊँ, तेजवीर मेरो नाम, ढोलक पर जो संगति दे रहे, पुष्पेन्द्र है नाम | दिगम्बर भैया को हमें तो चहिए साथ, भँवर में नैया डोल रही |

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HINDI BHAJAN

ओ पकड़ो पकड़ो रे सांवरिया मेरो हाथ, भँवर में नैया डोल रही, हे जी पकड़ो पकड़ो रे, हाँ जी पकड़ो पकड़ो रे, ओहो पकड़ो पकड़ो रे कन्हैया मेरो हाथ, भँवर में नैया डोल रही |

बड़े भाग्य जब होय हमारे, दर्शन देवें आप, सेवा तेरी ऐसी करूँगो, मिट जाएँ सारे पाप, ओ सीधी-सीधी सी कह दऊँ मैं तुमसे बात, भँवर में नैया डोल रही |

न तुम देखो ऊँच-नीच कूँ, ना तुम देखो जात, भरी सभा में द्रौपदी टेरी, रख लयी बाकी बात | ओ देदो-देदो रे सुदामा सी सौगात, भँवर में नैया डोल रही |

अपने बारे में मैं बताऊँ, तेजवीर मेरो नाम, ढोलक पर जो संगति दे रहे, पुष्पेन्द्र है नाम | दिगम्बर भैया को हमें तो चहिए साथ, भँवर में नैया डोल रही |

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अर्थ (Bhavarth)

ब्रज भूमि की मिट्टी की महक और एक सीधे-सादे भक्त की पुकार से भरा यह लोक-भजन (Folk Bhajan) बहुत ही प्यारा और आत्मीय है। गायक तेजवीर सिंह (Tejveer Singh) जी ने अपनी मंडली (पुष्पेन्द्र जी और दिगम्बर जी) के साथ मिलकर जिस सादगी से भगवान कृष्ण को पुकारा है, वह इसे एक आम इंसान के हृदय का गीत बना देता है। यह एक अत्यंत ही सरल, आत्मीय और ठेठ ब्रज भाषा का लोक-भजन है, जिसमें एक भक्त साक्षात भगवान को अपना सखा (मित्र) मानकर उनसे अपनी नैया पार लगाने की ज़िद कर रहा है। इसे तीन मुख्य भावों में समझा जा सकता है: 1. भँवर में फंसी जीवन नैया (The Sinking Boat of Life): भक्त बड़ी ही मासूमियत से अपने सांवरिया (श्री कृष्ण) को पुकारते हुए कहता है कि "हे कन्हैया! जल्दी से आकर मेरा हाथ पकड़ लो, क्योंकि मेरे जीवन रूपी नाव संसार के दुखों और परेशानियों के भँवर (Whirlpool) में डगमगा रही है।" भक्त कहता है कि मैं तुमसे कोई घुमा-फिरा कर बात नहीं करूँगा, बस सीधी-सीधी सी बात यह है कि जब मेरे बड़े भाग्य होंगे तभी मुझे तुम्हारे दर्शन मिलेंगे, और तब मैं तुम्हारी ऐसी सेवा करूँगा कि मेरे जन्मों-जन्मों के पाप धुल जाएंगे। 2. भगवान का बिना भेदभाव वाला प्रेम (Unconditional Divine Grace): भक्त भगवान की महिमा का बखान करते हुए कहता है कि मेरे सांवरिया कभी भी अपने भक्तों की जाति, ऊँच-नीच या हैसियत नहीं देखते। जब भरी सभा में दुशासन द्रौपदी का चीरहरण कर रहा था और उसने तुम्हें पुकारा (टेरी), तो तुमने तुरंत आकर उसकी लाज (बात) रख ली थी। तुमने गरीब सुदामा की दो मुट्ठी भेंट के बदले उसे तीनों लोकों का सुख (सौगात) दे दिया था; हे प्रभु, मुझे भी सुदामा जैसी ही कृपा और सौगात दे दो। 3. मंडली का आत्मीय परिचय (The Folk Artists' Signature): भजन के अंतिम अंतरे में ब्रज के लोकगीतों की एक बहुत ही सुंदर परंपरा दिखाई देती है, जहाँ गायक अपनी पूरी टीम का परिचय भगवान को देता है। गायक कहता है कि "हे प्रभु! मेरा नाम 'तेजवीर' है, जो ढोलक बजाकर मेरा साथ दे रहे हैं उनका नाम 'पुष्पेन्द्र' है, और हमें हमेशा अपने 'दिगम्बर भैया' का साथ चाहिए।" यह भोलापन इस भजन को एक साधारण मनुष्य की सबसे सच्ची पुकार बना देता है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'ओ पकड़ो पकड़ो रे सांवरिया' भजन किस शैली का गीत है?

A1: यह भजन 'ब्रज लोकगीत' (Braj Folk) और देहाती कीर्तन शैली का गीत है। इसमें शास्त्रीय नियमों से ज़्यादा एक भक्त के हृदय का भोलापन और भगवान के प्रति सखा-भाव (मित्रता) झलकता है।

Q2: इस भजन के गायक और उनकी मंडली के सदस्यों के नाम क्या हैं?

A2: भजन के अंतिम अंतरे के अनुसार, इस भजन के मुख्य गायक तेजवीर (Tejveer Singh) हैं। ढोलक पर संगत (साथ) देने वाले कलाकार का नाम पुष्पेन्द्र है, और मंडली के एक अन्य प्रमुख सदस्य दिगम्बर भैया हैं।

Q3: "भँवर में नैया डोल रही" का क्या अर्थ है?

A3: 'भँवर' पानी के उस चक्रवात को कहते हैं जिसमें नाव फंसकर डूब जाती है। यहाँ 'भँवर' का अर्थ जीवन की मुसीबतें, संकट और मोह-माया है, जिसमें फंसी अपनी जीवन रूपी नाव को बचाने के लिए भक्त श्री कृष्ण को पुकार रहा है।

Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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