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ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं (सूरदास जी का पद) लिरिक्स

Udho Jab Tedhe Din Aavain Lyrics - Indresh Upadhyay Lyrics

Location: श्री धाम वृंदावन (Shri Dham Vrindavan)

तर्ज (Tune): राग आधारित / पारंपरिक सूरदास पद (Raag Based / Traditional Surdas Pad)

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ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं (सूरदास जी का पद) लिरिक्स

UDHO JAB TEDHE DIN AAVAIN LYRICS INDRESH UPADHYAY

ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं, जब टेढ़े दिन आवैं। टेढ़ी-मेढ़ी बनी कूबरी, वाको हरि लपिटावैं। चंद्रवदन सी सुघड़ राधिका, वाको योग सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ ऊँचे-नीचे बैन कहत हैं, धिक बैठे बेलबावैं। मांगे कतौ कछु नहिं देवैं, नाहक दोष लगावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ इष्ट-मित्र मुखहू नहिं बोलैं, देखत नैन चुरावैं। सोना छुवत होत माटी, जब मूरख ज्ञान सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥ आपन-आपन भाग सखीरी, काको दोष लगावैं। सूरदास बिधना के आखर, छिनु भरि टरि न पावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

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ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं, जब टेढ़े दिन आवैं।

टेढ़ी-मेढ़ी बनी कूबरी, वाको हरि लपिटावैं। चंद्रवदन सी सुघड़ राधिका, वाको योग सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

ऊँचे-नीचे बैन कहत हैं, धिक बैठे बेलबावैं। मांगे कतौ कछु नहिं देवैं, नाहक दोष लगावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

इष्ट-मित्र मुखहू नहिं बोलैं, देखत नैन चुरावैं। सोना छुवत होत माटी, जब मूरख ज्ञान सिखावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

आपन-आपन भाग सखीरी, काको दोष लगावैं। सूरदास बिधना के आखर, छिनु भरि टरि न पावैं। ऊधो! जब टेढ़े दिन आवैं॥

ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं (सूरदास जी का पद) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

महाकवि सूरदास जी द्वारा रचित यह पद 'उद्धव-गोपी संवाद' (भ्रमर गीत) का एक अत्यंत मार्मिक प्रसंग है। जब उद्धव जी ब्रज में गोपियों को निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश देने आते हैं, तब गोपियाँ अपने दुर्भाग्य (टेढ़े दिनों) पर विलाप करते हुए व्यंग्य कसती हैं। वे कहती हैं, "हे उद्धव! जब मनुष्य के बुरे दिन आते हैं, तो सब कुछ उल्टा ही होता है। कन्हैया ने मथुरा जाकर टेढ़ी-मेढ़ी 'कुब्जा' को तो गले लगा लिया है, और चंद्रमा के समान सुंदर राधिका को तुम्हारे ज़रिए नीरस 'योग' का संदेश भेज रहे हैं।" जब समय खराब होता है तो अपने इष्ट-मित्र भी आँखें चुराने लगते हैं, हाथ लगाते ही सोना भी मिट्टी बन जाता है और मूर्ख लोग भी आकर ज्ञान सिखाने लगते हैं। अंत में गोपियाँ अपने भाग्य को ही दोष देती हैं कि विधाता के लिखे लेख को कोई मिटा नहीं सकता।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'ऊधो जब टेढ़े दिन आवैं' पद के रचयिता कौन हैं?

A1: इस अत्यंत भावपूर्ण और प्रसिद्ध पद की रचना अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ भक्त कवि महाकवि सूरदास जी (Mahakavi Surdas) द्वारा की गई है।

Q2: यह पद रामायण या भागवत के किस प्रसंग से लिया गया है?

A2: यह पद श्रीमद्भागवत महापुराण के सुप्रसिद्ध 'उद्धव-गोपी संवाद' (जिसे भ्रमर गीत भी कहा जाता है) प्रसंग पर आधारित है।

Q3: गोपियों ने 'टेढ़े दिन' (बुरे दिन) का क्या उदाहरण दिया?

A3: गोपियों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि बुरे दिनों का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि मथुरा में श्री कृष्ण ने दासी 'कुब्जा' को गले लगा लिया और परम सुंदरी श्री राधिका जी को योग (वैराग्य) का संदेश भिजवा दिया।

Categories: Braj Ras, Krishna Bhajan, Pad

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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