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सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है (माता का बुलावा) भजन लिरिक्स

Sapne Mein Jagdamba Ne Apna Dwar Dikhaya Hai Lyrics Lyrics

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सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है (माता का बुलावा) भजन लिरिक्स

SAPNE MEIN JAGDAMBA NE APNA DWAR DIKHAYA HAI LYRICS

ऊँचे ऊँचे पर्वत गाएँ हमको अपने पास बुलाएँ किस्मत वाले होते हैं वो माँ जिनको आवाज़ लगाए सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है मेरी आँखों में जो देखी तूने पीर थोड़ी-सी भी हँसते-हँसते माई तेरे नैना भरे हैं मेरी आँखों में जो देखी तूने पीर थोड़ी-सी भी हँसते-हँसते माई तेरे नैना भरे हैं तेरे जैसा कौन जग में, जब चुभे हैं काँटे पग में मुझसे पहले माई तेरे आँसू गिरे हैं बेटा माँ को भूल भी जाए, माँ ने कहाँ भुलाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है पौड़ी-पौड़ी चढ़ते जाओ, कहते जाओ "जय माता दी" पास बहुत है माँ का मन्दिर, सब दोहराओ "जय माता दी" रुकने पाए ना जयकारा, सारे गाओ "जय माता दी" सारे गाओ "जय माता दी" पाँव के छाले बोल रहे हैं, माँ के सिवा सब माया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

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ऊँचे ऊँचे पर्वत गाएँ हमको अपने पास बुलाएँ किस्मत वाले होते हैं वो माँ जिनको आवाज़ लगाए

सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

मेरी आँखों में जो देखी तूने पीर थोड़ी-सी भी हँसते-हँसते माई तेरे नैना भरे हैं मेरी आँखों में जो देखी तूने पीर थोड़ी-सी भी हँसते-हँसते माई तेरे नैना भरे हैं

तेरे जैसा कौन जग में, जब चुभे हैं काँटे पग में मुझसे पहले माई तेरे आँसू गिरे हैं बेटा माँ को भूल भी जाए, माँ ने कहाँ भुलाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

पौड़ी-पौड़ी चढ़ते जाओ, कहते जाओ "जय माता दी" पास बहुत है माँ का मन्दिर, सब दोहराओ "जय माता दी" रुकने पाए ना जयकारा, सारे गाओ "जय माता दी" सारे गाओ "जय माता दी"

पाँव के छाले बोल रहे हैं, माँ के सिवा सब माया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है आज तो रुकना मुश्किल है माँ का बुलावा आया है

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अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह भजन माता वैष्णो देवी (या पहाड़ों पर स्थित किसी भी देवी धाम) की यात्रा का एक अत्यंत सजीव और भावुक वर्णन है। इसे तीन मुख्य भावों में समझा जा सकता है: 1. पहाड़ों का बुलावा और दर्शन का स्वप्न: गीत की शुरुआत में बताया गया है कि ऊँचे-ऊँचे पर्वत भक्तों को अपने पास बुला रहे हैं। इस संसार में वे लोग बड़े किस्मत वाले होते हैं, जिन्हें माता रानी स्वयं आवाज़ लगाकर बुलाती हैं। भक्त खुशी से झूमता हुआ कहता है कि आज रात सपने में स्वयं माता जगदम्बा ने मुझे अपने दरबार (द्वार) के दर्शन कराए हैं; अब तो मेरा यहाँ रुकना नामुमकिन है क्योंकि मेरी माँ का बुलावा आ गया है। 2. माँ की करुणा और वात्सल्य: इस अंतरे में माँ और बच्चे के निश्छल प्रेम को दर्शाया गया है। भक्त भावुक होकर कहता है कि "हे माँ! जब भी तुमने मेरी आँखों में ज़रा सी भी 'पीर' (तकलीफ) देखी, तो मेरी खातिर तुम्हारी आँखें भर आईं। जब मेरे पैरों (पग) में कांटा चुभता है, तो दर्द मुझे बाद में होता है, तुम्हारे आँसू पहले गिर जाते हैं।" एक बच्चा भले ही अपनी माँ को भूल जाए, लेकिन माता रानी कभी अपने बच्चों को नहीं भूलतीं। 3. कठिन चढ़ाई और 'जय माता दी' का जयकारा: अंतिम भाग में यात्रा का जोश है। भक्त लगातार "जय माता दी" का जयकारा लगाते हुए एक-एक सीढ़ी (पौड़ी) चढ़ रहे हैं। लंबी यात्रा से उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं, लेकिन वे छाले भी यही गवाही दे रहे हैं कि इस दुनिया में माता रानी के प्यार के सिवा बाकी सब मोह-माया है।

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Frequently Asked Questions

Q1: "सपने में जगदम्बा ने अपना द्वार दिखाया है" भजन मुख्य रूप से किस यात्रा से जुड़ा है?

A1: यह अत्यंत लोकप्रिय 'devi maa ka bhajan' मुख्य रूप से माता वैष्णो देवी की कठिन पहाड़ी यात्रा से जुड़ा है। जब भक्तों को माता के दर्शनों की तीव्र इच्छा होती है या उन्हें बुलावा महसूस होता है, तब यह भजन गाया जाता है।

Q2: "जब चुभे हैं काँटे पग में, मुझसे पहले माई तेरे आँसू गिरे हैं" का क्या अर्थ है?

A2: यह पंक्ति माता की अपार करुणा और वात्सल्य को दर्शाती है। भक्त कह रहा है कि हे माँ! तुम मुझसे इतना प्यार करती हो कि जब मेरे पैरों में कांटा चुभता है, तो दर्द मुझे बाद में होता है, लेकिन मेरी तकलीफ देखकर तुम्हारी आँखों से आँसू पहले छलक जाते हैं।

Q3: "पाँव के छाले बोल रहे हैं, माँ के सिवा सब माया है" का क्या भाव है?

A3: लंबी और कठिन पहाड़ी चढ़ाई करने के कारण भक्तों के पैरों में छाले पड़ गए हैं। लेकिन शारीरिक कष्ट के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं हुआ है। उनके छाले पड़े हुए पैर भी यही संदेश दे रहे हैं कि इस दुनिया की सारी मोह-माया झूठी है, केवल माता का प्रेम और उनका दरबार ही सच्चा है।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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