Shri KrishnaKrishna BhajanBraj Ras

मेरे मन की बताऊँ सांच ओ सांच

Mere Man Ki Bataun Saanch O Saanch Lyrics Lyrics

Location: Sonkh, Magorra (Mathura)

तर्ज (Tune): श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो (Shri Goverdhan Maharaj)

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मेरे मन की बताऊँ सांच ओ सांच

MERE MAN KI BATAUN SAANCH O SAANCH KRISHNA BHAJAN

मेरे मन की बताऊँ सांच ओ सांच, ई लगो मुरलिया वारे ते। ई लगो मुरलिया वारे ते, ई लगो है कनुआ कारे ते॥ नाय काम करन में जी लागे, सपने में भी ये बतरावै। मेरे दिल की करा देयो जाँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥ मेरी सास लड़े मोते भारी है, दे उल्टी सीधी गारी है। कहवे दे दूंगी तोमे आँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥ दुनिया से मैं लड़ जाउंगी, पर श्याम भूल नहीं पाउंगी। चाहे खाने पड़ें मोये काँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥ ना मानू बात सबन की हूँ, वो मेरे हैं, मै उनकी हूँ। उन बिना ना लुंगी साँस, ई लगो मुरलिया वारे ते॥

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HINDI BHAJAN

मेरे मन की बताऊँ सांच ओ सांच, ई लगो मुरलिया वारे ते। ई लगो मुरलिया वारे ते, ई लगो है कनुआ कारे ते॥

नाय काम करन में जी लागे, सपने में भी ये बतरावै। मेरे दिल की करा देयो जाँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥

मेरी सास लड़े मोते भारी है, दे उल्टी सीधी गारी है। कहवे दे दूंगी तोमे आँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥

दुनिया से मैं लड़ जाउंगी, पर श्याम भूल नहीं पाउंगी। चाहे खाने पड़ें मोये काँच, ई लगो मुरलिया वारे ते॥

ना मानू बात सबन की हूँ, वो मेरे हैं, मै उनकी हूँ। उन बिना ना लुंगी साँस, ई लगो मुरलिया वारे ते॥

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अर्थ (Bhavarth)

यह एक अत्यंत भावपूर्ण और ठेठ ब्रज रस का लोकगीत है। इसमें एक गोपी अपनी सखी से अपने मन की सच्ची बात (सांच ओ सांच) बता रही है कि उसे मुरली वाले काले कन्हैया (कनुआ कारे) से प्रेम का रोग लग गया है। इस प्रेम के कारण उसका किसी काम में मन नहीं लगता और कन्हैया सपनों में भी आकर उससे बातें करते हैं। उसकी सास उसे बहुत ताने और गालियाँ देती है, यहाँ तक कि जलाने (आँच देने) की धमकी भी देती है, पर गोपी दृढ़ता से कहती है कि वह दुनिया से लड़ जाएगी, काँच भी खा लेगी, लेकिन अपने श्याम को कभी नहीं भूलेगी क्योंकि कन्हैया उसके हैं और वह कन्हैया की है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'मेरे मन की बताऊँ सांच ओ सांच' भजन किस तर्ज पर गाया गया है?

यह सुंदर ब्रज भजन सुप्रसिद्ध पारंपरिक गीत "श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो" की अत्यंत लोकप्रिय तर्ज पर गाया जाता है।

Q2: इस भजन में गोपी समाज के तानों का जवाब कैसे देती है?

भजन में गोपी निडर होकर कहती है कि सास चाहे कितनी भी गालियाँ दे या दुनिया कितनी भी खिलाफ हो जाए, वह अपने श्याम को नहीं छोड़ेगी। वह श्याम के बिना साँस भी नहीं ले सकती।

Q3: ब्रज भाषा में 'कनुआ कारे' का क्या अर्थ है?

ब्रज भाषा में 'कनुआ' कन्हैया (श्री कृष्ण) को लाड़-प्यार से कहा जाता है और 'कारे' का अर्थ काले या साँवले रंग से है।

Categories: Krishna Bhajan, Braj Ras

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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