चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ (गंगा के किनारे बैठ के) शिव भजन लिरिक्स
Chand Ko Niharun Shiv Ko Pukarun Lyrics (Ganga Ke Kinare) Lyrics
चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के… गंगा के किनारे बैठ के
रूह को सँवारूँ आरती उतारूँ गंगा के किनारे बैठ के बैठ के…
हम तो हमारे ही जीवन से हैं इतने सताए हुए टूटे हैं, बिखरे हैं हम तो सबके भुलाए हुए
कहते हैं, आए जो गंगा नहाए हर जाते हैं सब रोग अब हमने समझा है अब हमने जाना क्यों गंगा आते हैं लोग
थक गए थे हम दुखों को उठाकर अब चैन आया आई अब साँसें गंगा के किनारे बैठ के बैठ के…
क्यों रोए हर बात में बन्दया क्या लाया था साथ में बन्दया जाने दे जो चला गया है कुछ भी नहीं तेरे हाथ में बन्दया
मन नहीं भरता जितना भी ताकें इतना सुकून है भर गई आँखें गंगा के किनारे बैठ के…
गंगा धऱाय शिवाय, गंगा धऱाय हर हर भोले नमः शिवाय…

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: "चाँद को निहारूँ शिव को पुकारूँ" भजन का मूल संदेश क्या है?
A1: यह भजन वैराग्य और आत्म-शांति का संदेश देता है। यह बताता है कि जब इंसान दुनिया के दुखों और भागदौड़ से थक जाता है, तो ईश्वर (शिव) का ध्यान और प्रकृति (गंगा का किनारा) ही उसे सच्चा सुकून और चैन की साँस देते हैं।
Q2: भजन में "क्यों रोए हर बात में बन्दया" का क्या अर्थ है?
A2: 'बन्दया' (Bandeya) का अर्थ है 'हे मनुष्य' या 'हे ईश्वर के बंदे'। यह पंक्ति इंसान को समझाती है कि दुनिया में जो कुछ भी छूट गया है उसके लिए रोना व्यर्थ है, क्योंकि इंसान इस दुनिया में खाली हाथ ही आया था और खाली हाथ ही जाएगा।
Q3: "गंगा धऱाय शिवाय" मंत्र का क्या तात्पर्य है?
A3: 'गंगा धराय' का अर्थ है 'गंगा को धारण करने वाले'। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव ने पृथ्वी को विनाश से बचाने के लिए माता गंगा के तीव्र वेग को अपनी जटाओं में धारण किया था। इसलिए उन्हें गंगाधर भी कहा जाता है।
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Categories: ganga mata
Deity: Mata Rani
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