Shri KrishnaKrishna Bhajan

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशोमति के हितकारी

Bhaye Pragat Gopaala Deenadayaala Yashomati Ke Hitakaaree Lyrics

HINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARIHINDI BHAJAN MANJARI

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशोमति के हितकारी

BHAYE PRAGAT GOPAALA DEENADAYAALA YASHOMATI KE HITAKAAREE

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला, यशोमति के हितकारी, हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी।।१।। कंसासुर जाना अति भय माना, पुतना बेगि पठाई, सो मन मुसुकाई हर्षित धाई, गई जहाँ जदुराई।।२।। तेहि जाई उठाई हृदय लगाई, पयोधर मुख में दीन्हे, तब कृष्ण कन्हाई मन मुसकाई, प्राण तासु हरी लीन्हे।।३।। जब इन्द्र रिसाये मेघ पठाये, बस ताहि मुरारी, गौवन हितकारी मुनि मनहारी, नख पर गिरिवर धारी।।४।। कंसासुर मारो अति हंकारो, वत्सासुर संहारो, बकरासुर आयो बहुत डरायो, ताकर बदन बिडारो।।५।। तेहि अतिथि न जानी प्रभु चक्रपाणी, ताहि दियो निज शोका, ब्रम्हा शिव आये अति सुख पाए, मगन भये गये लोका।।६।। यह छंद अनूपा है रस रूपा, जो नर याको गावे, तेहि सम नहि कोई त्रिभुवन माही, मनवांछित फल पावे।।७।। भये प्रगट गोपाला दीनदयाला, यशोमति के हितकारी, हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी।।१।। दोहा – नन्द यशोदा तप कियो, मोहन सो मन लाय, तासो हरि तिन्ह सुख दियो, बाल भाव दिखलाय।। जेहि नक्षत्र मोहन भये, सो नक्षत्र बड़िआय, चार बधाई रीति सो, करत यशोदा माय।।

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भये प्रगट गोपाला दीनदयाला, यशोमति के हितकारी, हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी।।१।।

कंसासुर जाना अति भय माना, पुतना बेगि पठाई, सो मन मुसुकाई हर्षित धाई, गई जहाँ जदुराई।।२।।

तेहि जाई उठाई हृदय लगाई, पयोधर मुख में दीन्हे, तब कृष्ण कन्हाई मन मुसकाई, प्राण तासु हरी लीन्हे।।३।।

जब इन्द्र रिसाये मेघ पठाये, बस ताहि मुरारी, गौवन हितकारी मुनि मनहारी, नख पर गिरिवर धारी।।४।।

कंसासुर मारो अति हंकारो, वत्सासुर संहारो, बकरासुर आयो बहुत डरायो, ताकर बदन बिडारो।।५।।

तेहि अतिथि न जानी प्रभु चक्रपाणी, ताहि दियो निज शोका, ब्रम्हा शिव आये अति सुख पाए, मगन भये गये लोका।।६।।

यह छंद अनूपा है रस रूपा, जो नर याको गावे, तेहि सम नहि कोई त्रिभुवन माही, मनवांछित फल पावे।।७।।

भये प्रगट गोपाला दीनदयाला, यशोमति के हितकारी, हर्षित महतारी रूप निहारी, मोहन मदन मुरारी।।१।।

दोहा – नन्द यशोदा तप कियो, मोहन सो मन लाय, तासो हरि तिन्ह सुख दियो, बाल भाव दिखलाय।। जेहि नक्षत्र मोहन भये, सो नक्षत्र बड़िआय, चार बधाई रीति सो, करत यशोदा माय।।

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अर्थ (Bhavarth)

(भावार्थ एवं शब्दार्थ) - महतारी (Mahtari): माता (मैया यशोदा)। जदुराई (Jadurai): यदुवंश के राजा (भगवान श्री कृष्ण)। पयोधर (Payodhar): स्तन (Breast - पूतना प्रसंग में)। नख पर गिरिवर धारी: उंगली के नख पर गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले। बदन बिडारो: शरीर को फाड़ दिया (बकासुर वध के संदर्भ में)। चक्रपाणी: जिनके हाथ में सुदर्शन चक्र है (भगवान विष्णु/कृष्ण)। संपूर्ण भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले और माता यशोदा का कल्याण करने वाले 'गोपाल' (श्री कृष्ण) प्रकट हुए हैं। उनके इस मोहिनी रूप को देखकर माता बहुत हर्षित (प्रसन्न) हैं। जब अत्याचारी कंस को यह बात पता चली, तो उसने डरकर पूतना राक्षसी को भेजा, जिसके प्राण भगवान ने दूध पीने के बहाने हर लिए। जब देवराज इन्द्र ने क्रोधित होकर भारी वर्षा की, तब प्रभु ने गायों और गोकुल की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने नख (उंगली) पर उठा लिया। प्रभु ने कंस, वत्सासुर और बकासुर जैसे भयंकर राक्षसों का संहार किया। उनकी इन लीलाओं को देखकर ब्रह्मा और शिवजी भी अत्यंत सुख पाते हैं। दोहे का अर्थ: नन्द बाबा और माता यशोदा ने पिछले जन्म में भगवान का मन से तप किया था, उसी तप का फल देने के लिए श्री हरि (विष्णु) ने बाल रूप धारण करके उन्हें सुख दिया है। जिस शुभ नक्षत्र (रोहिणी) में प्रभु प्रकट हुए हैं, माता यशोदा चारों ओर बधाइयां बंटवा रही हैं। जो भी मनुष्य इस रस रूपी छंद को गाता है, वह तीनों लोकों में मनवांछित फल प्राप्त करता है।

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यहाँ आप भये प्रगट गोपाला दीनदयाला यशोमति के हितकारी के संपूर्ण और शुद्ध पाठ का आनंद ले सकते हैं। हमारी वेबसाइट पर आप इस कृष्ण भजन को हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ गुजराती, बंगाली और अन्य 6 भारतीय भाषाओं में पढ़ सकते हैं।इस रचना के आध्यात्मिक रहस्य को समझने के लिए आप ऊपर इसका 'भावार्थ' (अर्थ) भी पढ़ सकते हैं। दैनिक पूजा और सत्संग के लिए आप इसका PDF (पीडीएफ) मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: 'भये प्रगट गोपाला दीनदयाला' स्तुति का मुख्य विषय क्या है?

A1: यह एक अत्यंत पावन 'अवतार स्तुति' है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जन्म (प्रकट होने) से लेकर उनकी अद्भुत बाल लीलाओं—जैसे पूतना वध, गोवर्धन पर्वत उठाना, वत्सासुर, बकासुर और कंसासुर के वध—का बहुत ही सुंदर और संक्षिप्त वर्णन किया गया है।

Q2: दोहे में "नन्द यशोदा तप कियो" का क्या अर्थ है?

A2: इस पंक्ति का अर्थ है कि नन्द बाबा और माता यशोदा ने अपने पूर्व जन्म (द्रोण वसु और धरा) में भगवान विष्णु को पुत्र रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसी तपस्या का वरदान देने के लिए भगवान ने उनके घर बाल रूप (कृष्ण) में अवतार लिया है।

Q3: क्या मैं 'Bhaye Pragat Gopala Stuti PDF' डाउनलोड कर सकता हूँ?

A3: जी हाँ! आप इसी पेज पर, लिरिक्स के ठीक ऊपर दिए गए 'Download PDF' और 'Translate' बटन पर क्लिक करके इस पावन स्तुति को अपनी मनपसंद भाषा में बिलकुल मुफ्त में सेव कर सकते हैं।

Categories: Krishna Bhajan

Deity: Shri Krishna

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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