अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली (आरती) लिरिक्स
Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti Lyrics Lyrics
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली, तेरे ही गुण गाएँ भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
तेरे भक्त जनों पर, माता, भीड़ पड़ी है भारी। दानव-दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥ सौ-सौ सिंहों से है बलशाली, है अष्टभुजाओं वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता। पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुने न कुमाता॥ सब पर करुणा बरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली, दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
नहीं माँगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना। हम तो माँगें, माँ, तेरे मन में एक छोटा-सा कोना॥ सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली, सतियों के सत को सँवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्परवाली, तेरे ही गुण गाएँ भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' आरती में "भारती" शब्द का क्या अर्थ है?
A1: आरती की पंक्ति "तेरे ही गुण गाएँ भारती" में 'भारती' शब्द का अर्थ है 'संपूर्ण भारतवर्ष' (समस्त भारतवासी) या 'माता सरस्वती'। इसका भाव है कि पूरा देश या ज्ञान की देवी भी माता दुर्गा के ही गुण गाते हैं।
Q2: "पूत कपूत सुने हैं पर ना, माता सुने न कुमाता" का क्या तात्पर्य है?
A2: यह पंक्ति 'दुर्गा सप्तशती' के क्षमा-प्रार्थना स्तोत्र (कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति) से प्रेरित है। इसका तात्पर्य है कि एक बेटा भले ही बुरा (कपूत) हो सकता है और अपनी माँ से मुँह मोड़ सकता है, लेकिन एक माँ कभी बुरी (कुमाता) नहीं हो सकती; वह हमेशा अपने बच्चों को माफ़ कर देती है।
Q3: "खप्परवाली" किसे कहा जाता है?
A3: 'खप्परवाली' माता महाकाली का एक रूप और नाम है। राक्षसों (विशेषकर रक्तबीज) का संहार करते समय माता ने अपने हाथ में एक पात्र (खप्पर) धारण किया था, इसलिए उन्हें खप्परवाली कहा जाता है।
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Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special, Aarti
Deity: Mata Rani
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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