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अंबे जगदंबे मेरी शेरावाली माँ, मुझे चरणों में लगा लो (भजन) लिरिक्स

Ambe Jagdambe Meri Sherawali Maa Lyrics Lyrics

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अंबे जगदंबे मेरी शेरावाली माँ, मुझे चरणों में लगा लो (भजन) लिरिक्स

AMBE JAGDAMBE MERI SHERAWALI MAA LYRICS

अंबे जगदंबे मेरी शेरावाली माँ जगदंबे माँ भवानी शेरावाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ जगदंबे माँ भवानी शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ कब से लगी है दिल में लगन माँ तेरे दरस को प्यासा है मन माँ कब से लगी है दिल में लगन माँ तेरे दरस को प्यासा है मन माँ धरती पे तेरा भवन सजा है देखे तुझको सारा गगन माँ दर्शन को व्याकुल है मन माँ व्याकुल है मन माँ, व्याकुल है मन माँ माँ दर्शन तू दिखा दे शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ भवसागर से पार लगाना मुझसे कभी ना दामन छुड़ाना भवसागर से पार लगाना मुझसे कभी ना दामन छुड़ाना छोड़ के दुनिया आई हूँ मैं तेरा भवन है मेरा ठिकाना मुझको माता भूल ना जाना भूल ना जाना, भूल ना जाना मेरे कष्ट तू मिटा दे शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरावाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ शेरावाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ

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अंबे जगदंबे मेरी शेरावाली माँ जगदंबे माँ भवानी शेरावाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ जगदंबे माँ भवानी शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरा वाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ

कब से लगी है दिल में लगन माँ तेरे दरस को प्यासा है मन माँ कब से लगी है दिल में लगन माँ तेरे दरस को प्यासा है मन माँ धरती पे तेरा भवन सजा है देखे तुझको सारा गगन माँ दर्शन को व्याकुल है मन माँ व्याकुल है मन माँ, व्याकुल है मन माँ माँ दर्शन तू दिखा दे शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ

भवसागर से पार लगाना मुझसे कभी ना दामन छुड़ाना भवसागर से पार लगाना मुझसे कभी ना दामन छुड़ाना छोड़ के दुनिया आई हूँ मैं तेरा भवन है मेरा ठिकाना मुझको माता भूल ना जाना भूल ना जाना, भूल ना जाना मेरे कष्ट तू मिटा दे शेरा वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ मुझे चरणों में लगा लो ज्योता वाली माँ शेरावाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ शेरावाली है माँ, ज्योता वाली है माँ मेहरा वाली है माँ, बणरा वाली है माँ

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अर्थ (Bhavarth)

(विस्तृत भावार्थ): यह 'devi geet' माता के प्रति पूर्ण शरणागति और उनके पावन दर्शनों की गहरी प्यास का प्रतीक है। इसके भावों को इस प्रकार समझें: 1. चरणों में स्थान और माता के विविध रूप: भजन की शुरुआत में भक्त माता को उनके अनेक प्रिय नामों— अंबे, जगदंबे, भवानी, शेरावाली, ज्योतावाली और मेहरावाली (कृपा करने वाली) से पुकारता है। भक्त बड़ी ही विनम्रता से माता रानी से विनती करता है कि "हे ज्योतियों वाली माँ! मुझे भी अपने चरणों की सेवा में लगा लो।" 2. दर्शनों की प्यास और व्याकुलता: दूसरे अंतरे में भक्त कहता है कि "हे माँ! न जाने कब से मेरे दिल में तुम्हारे दर्शनों की लगन (चाहत) लगी हुई है और मेरा मन तुम्हारे 'दरस' (दर्शन) के लिए प्यासा है।" भक्त माता के दरबार की महिमा का गुणगान करते हुए कहता है कि धरती पर तुम्हारा इतना सुंदर भवन सजा है जिसे सारा आकाश (गगन) भी देखता है। भक्त का मन बहुत व्याकुल (बेचैन) है और वह माता से एक झलक दिखाने की पुकार कर रहा है। 3. भवसागर से पार और संसार का त्याग: अंतिम भाग पूर्ण वैराग्य और समर्पण का संदेश देता है। भक्त (या गायिका) माता से कहता है कि "हे माँ! मुझे इस संसार रूपी भवसागर से पार लगा देना और कभी मुझसे अपना दामन मत छुड़ाना (मेरा साथ मत छोड़ना)।" भक्त ने इस स्वार्थी दुनिया को छोड़ दिया है और अब माता रानी का भवन ही उसका एकमात्र और सच्चा ठिकाना है। वह विनती करता है कि हे माँ, मुझे कभी मत भूलना और मेरे सारे कष्ट मिटा देना।

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Frequently Asked Questions

Q1: "अंबे जगदंबे मेरी शेरावाली माँ" भजन का मुख्य भाव क्या है?

A1: यह अत्यंत भावपूर्ण 'devi maa ka bhajan' पूर्ण 'शरणागति' (Surrender) का प्रतीक है। इसमें भक्त सांसारिक मोह-माया छोड़कर माता के भवन को ही अपना अंतिम ठिकाना मानता है और उनके चरणों में जगह मांगता है।

Q2: भजन में "भवसागर से पार लगाना" का क्या अर्थ है?

A2: 'भवसागर' का अर्थ है यह जन्म और मृत्यु का चक्र या दुखों से भरा संसार। भक्त माता से प्रार्थना कर रहा है कि अपनी कृपा से मुझे इस सांसारिक कष्टों के सागर से पार (मोक्ष) लगा देना।

Q3: माता को 'मेहरा वाली' और 'ज्योता वाली' क्यों कहा जाता है?

A3: 'मेहर' का अर्थ होता है कृपा या दया, इसलिए माता को 'मेहरा वाली' (कृपा करने वाली) कहा जाता है। 'ज्योता वाली' माता को इसलिए कहते हैं क्योंकि उनके दरबार (जैसे वैष्णो देवी, ज्वाला जी) में अखंड ज्योति (Flame) निरंतर प्रज्वलित रहती है।

Categories: Mata Ke Bhajan, Navratri Special

Deity: Mata Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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