आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी (नवरात्रि चौथा दिन) लिरिक्स
Aarti Kushmanda Maa Ki Lyrics (Navratri Day 4) Lyrics
तर्ज (Tune): आरती कुञ्ज बिहारी की (aarti kunj bihaari ki)
आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी। नवरात्रा चौथा दिन मैया, भरे खाली झोली मैया, है आँचल में शीतल छैया, मिटाए दुख, रहें सब खुश माँ देती सुख, गूंजे जयकार महामा की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।
महिमा हर कोई गाए, और दर्शन को चल आए, बिना माँगे ही सब पाए, खुला दरबार लुटाए प्यार, कहे संसार, लगे दरबार शरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।
मिटाए मिटते नहीं रेखा, रखे जन-जन का वे लेखा, कहाँ माँ करती अनदेखा, जो आए द्वार, करे उपकार, भरे भंडार, झुके संसार चरण माँ की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।
लगे मेला माँ के द्वारे, मगन मन झूम रहे सारे, कहूँ क्या लीला मैं प्यारी, है सांचा धाम, बने हर काम, जो लेवे नाम, करूँ सेवा मैं माता की। आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी, आरती कूष्मांडा माँ की, देख मन झूम उठे झांकी।

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: "आरती कूष्मांडा माँ की" किस दिन गाई जाती है?
A1: यह अत्यंत शुभ आरती विशेष रूप से नवरात्रि के चौथे दिन (चतुर्थी तिथि) पर माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप— 'माँ कूष्मांडा' की पूजा-अर्चना के दौरान गाई जाती है।
Q2: माँ कूष्मांडा को यह नाम क्यों दिया गया है?
A2: 'कूष्मांड' का अर्थ कुम्हड़ा (पेठा/कद्दू) होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अपनी मंद और हल्की हँसी द्वारा 'अंड' (ब्रह्मांड) को उत्पन्न करने के कारण इन्हें 'कूष्मांडा' कहा गया है।
Q3: आरती में "मिटाए मिटते नहीं रेखा" का क्या अर्थ है?
A3: इसका अर्थ है कि माता कूष्मांडा ही भाग्य की विधाता हैं। उनके द्वारा लिखी गई भाग्य की रेखा को कोई मिटा नहीं सकता। वे हर व्यक्ति (जन-जन) के कर्मों का हिसाब रखती हैं और उसी के अनुसार फल देती हैं।
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Categories: Aarti, Mata Ke Bhajan, Navratri Special
Deity: Mata Rani
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मोहित तरकरMohit Tarkar
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