जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी (गौरी माँ स्तुति) लिरिक्स
Jai Jai Giriraj Kishori (O Maiya Shringar Tera Laal Hai) Lyrics Lyrics
जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥
ओ मैया, श्रृंगार तेरा लाल है, लाल महावर, लाल लाल मेहंदी। लाल सिंदूर तो लाल लाल चुनरी, मृगमद का तिलक तेरे भाल है। दर्शन करके ये मनवा निहाल है, ओ गौरी, श्रृंगार तेरा लाल है॥
मनवांछित वर देने वाली, रखियो अमर सुहाग की लाली। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥
जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥

अर्थ (Bhavarth)
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Frequently Asked Questions
Q1: 'जय जय गिरिराज किशोरी' भजन में माता पार्वती को 'चकोरी' क्यों कहा गया है?
A1: कवि ने यहाँ एक बहुत ही सुंदर उपमा दी है। जिस प्रकार 'चकोर' पक्षी चंद्रमा से प्रेम करता है और उसे एकटक निहारता रहता है, उसी प्रकार माता पार्वती (गौरी) भी भगवान शिव (महेश) के मुख रूपी चंद्रमा को अपार प्रेम से निहारती रहती हैं।
Q2: भजन में माता गौरी के 'लाल श्रृंगार' का क्या महत्व है?
A2: हिंदू धर्म में 'लाल रंग' सुहाग, सौभाग्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। माता पार्वती साक्षात 'अमर सुहागन' हैं, इसलिए उनके श्रृंगार (महावर, मेहंदी, सिंदूर, चुनरी) को लाल बताया गया है, और महिलाएँ उनसे अपने अमर सुहाग की कामना करती हैं।
Q3: इस भजन में "मृगमद" शब्द का क्या अर्थ है?
A3: 'मृगमद' का अर्थ 'कस्तूरी' (Musk) होता है, जो अत्यंत सुगंधित होती है। माता गौरी अपने मस्तक (भाल) पर इसी कस्तूरी का तिलक धारण करती हैं।
Categories: Mata Ke Bhajan, Aarti, Navratri Special, Gauri Maa
Deity: Mata Gauri (Goddess Parvati)
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मोहित तरकरMohit Tarkar
संस्थापक एवं मुख्य संपादक • Founder & Chief Editor
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