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जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी (गौरी माँ स्तुति) लिरिक्स

Jai Jai Giriraj Kishori (O Maiya Shringar Tera Laal Hai) Lyrics Lyrics

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जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी (गौरी माँ स्तुति) लिरिक्स

JAI JAI GIRIRAJ KISHORI O MAIYA SHRINGAR TERA LAAL HAI LYRICS

जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥ ओ मैया, श्रृंगार तेरा लाल है, लाल महावर, लाल लाल मेहंदी। लाल सिंदूर तो लाल लाल चुनरी, मृगमद का तिलक तेरे भाल है। दर्शन करके ये मनवा निहाल है, ओ गौरी, श्रृंगार तेरा लाल है॥ मनवांछित वर देने वाली, रखियो अमर सुहाग की लाली। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥ जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥

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जय जय गिरिराज किशोरी, जय महेश मुख चन्द्र चकोरी। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥

ओ मैया, श्रृंगार तेरा लाल है, लाल महावर, लाल लाल मेहंदी। लाल सिंदूर तो लाल लाल चुनरी, मृगमद का तिलक तेरे भाल है। दर्शन करके ये मनवा निहाल है, ओ गौरी, श्रृंगार तेरा लाल है॥

मनवांछित वर देने वाली, रखियो अमर सुहाग की लाली। जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥

जय गौरी माँ, तेरी जय हो गौरी माँ, अमर सुहागन जय देवी माँ॥

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अर्थ (Bhavarth)

(शब्दार्थ) - गिरिराज किशोरी (Giriraj Kishori): पर्वतों के राजा (हिमालय) की पुत्री, अर्थात् माता पार्वती। महेश मुख चन्द्र चकोरी (Mahesh Mukh Chandra Chakori): भगवान शिव (महेश) के मुख रूपी चंद्रमा को चकोर पक्षी की तरह एकटक निहारने वाली। अमर सुहागन (Amar Suhagan): जिनका सौभाग्य (सुहाग) सदा अमर रहे (Eternal Consort of Lord Shiva)। महावर (Mahavar): सुहागिन स्त्रियों द्वारा पैरों में लगाया जाने वाला लाल रंग (आलता / Alta)। मृगमद (Mrigmad): कस्तूरी (Musk), जिसका तिलक लगाया जाता है। भाल (Bhaal): मस्तक या माथा (Forehead)। निहाल (Nihaal): अत्यंत प्रसन्न या कृतार्थ (Overjoyed / Blessed)। मनवांछित (Manvanchhit): मन की इच्छा के अनुसार (Desired)। संपूर्ण भावार्थ: इस स्तुति में माता गौरी (पार्वती) की वंदना करते हुए भक्त कहता है कि "हे पर्वतों के राजा की पुत्री और भगवान शिव के मुख रूपी चंद्रमा को निहारने वाली माता गौरी, आपकी जय हो! हे अमर सुहागन देवी, आपकी जय हो!" भक्त माता के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहता है कि "हे मैया! आपका पूरा श्रृंगार लाल रंग का है। आपके पैरों में लाल महावर (आलता) है, हाथों में लाल मेहंदी है, माँग में लाल सिंदूर और सिर पर लाल चुनरी है। आपके मस्तक (भाल) पर कस्तूरी (मृगमद) का सुंदर तिलक सजा है। आपके इस मनमोहक स्वरूप के दर्शन करके मेरा मन निहाल (प्रसन्न) हो गया है।" अंत में भक्त प्रार्थना करता है कि "हे मनचाहा वरदान देने वाली माता! आप हम सभी के सुहाग की इस लाल रंगत को हमेशा बनाए रखना और हमारी रक्षा करना।"

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Frequently Asked Questions

Q1: 'जय जय गिरिराज किशोरी' भजन में माता पार्वती को 'चकोरी' क्यों कहा गया है?

A1: कवि ने यहाँ एक बहुत ही सुंदर उपमा दी है। जिस प्रकार 'चकोर' पक्षी चंद्रमा से प्रेम करता है और उसे एकटक निहारता रहता है, उसी प्रकार माता पार्वती (गौरी) भी भगवान शिव (महेश) के मुख रूपी चंद्रमा को अपार प्रेम से निहारती रहती हैं।

Q2: भजन में माता गौरी के 'लाल श्रृंगार' का क्या महत्व है?

A2: हिंदू धर्म में 'लाल रंग' सुहाग, सौभाग्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। माता पार्वती साक्षात 'अमर सुहागन' हैं, इसलिए उनके श्रृंगार (महावर, मेहंदी, सिंदूर, चुनरी) को लाल बताया गया है, और महिलाएँ उनसे अपने अमर सुहाग की कामना करती हैं।

Q3: इस भजन में "मृगमद" शब्द का क्या अर्थ है?

A3: 'मृगमद' का अर्थ 'कस्तूरी' (Musk) होता है, जो अत्यंत सुगंधित होती है। माता गौरी अपने मस्तक (भाल) पर इसी कस्तूरी का तिलक धारण करती हैं।

Categories: Mata Ke Bhajan, Aarti, Navratri Special, Gauri Maa

Deity: Mata Gauri (Goddess Parvati)

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

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