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वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर (वैष्णो माता भजन) लिरिक्स

Vaishnavi Bhawani Maa Ke Hathon Mein Jag Ki Dor Lyrics Lyrics

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वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर (वैष्णो माता भजन) लिरिक्स

VAISHNAVI BHAWANI MAA KE HATHON MEIN JAG KI DOR LYRICS

वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर, माँ के ही संकेत पे हो, दिन, रैन, सांझ और भोर संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता। ममता रुपी सार है , वैष्णो माता , अपरम्पार है माँ की महिमा, अमिट है गाथा गौरव गरिमा | संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता। नव देवी का रूप है माँ, महा शक्ति स्वरुप है माँ , पालनहारी है माँ त्रिकुटा , कहीं छाँव, कहीं धूप है माँ | रंग केसरिया माँ का बाना, सिन्दूरी रंग अंग सुहाना, संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता। वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर, वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर। संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।

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वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर, माँ के ही संकेत पे हो, दिन, रैन, सांझ और भोर संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता। ममता रुपी सार है , वैष्णो माता , अपरम्पार है माँ की महिमा, अमिट है गाथा गौरव गरिमा | संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।

नव देवी का रूप है माँ, महा शक्ति स्वरुप है माँ , पालनहारी है माँ त्रिकुटा , कहीं छाँव, कहीं धूप है माँ | रंग केसरिया माँ का बाना, सिन्दूरी रंग अंग सुहाना, संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।

वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर, वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर। संसार का संचार है वैष्णो माता, संसार का आधार है वैष्णो माता।

वैष्णवी भवानी माँ के, हाथों में जग की डोर (वैष्णो माता भजन) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

चैत्र नवरात्रि बस आने ही वाली है, और ऐसे पावन समय में माता वैष्णो देवी की स्तुति का यह भजन 'वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर' भक्तों के मन में एक अद्भुत शांति और विश्वास जगाता है। इस भजन में माता रानी को इस पूरे ब्रह्मांड का आधार और संचालनकर्ता बताया गया है। यह भजन माता वैष्णो देवी (आदि शक्ति) की सर्वव्यापकता और उनकी असीम शक्ति का एक अत्यंत ही दार्शनिक और सुंदर वर्णन है। इस स्तुति के गहरे भावों को तीन मुख्य चरणों में समझा जा सकता है: 1. सृष्टि की संचालिका और आधार (The Supreme Controller & Foundation): भजन की शुरुआत में ही यह परम सत्य बताया गया है कि इस पूरे संसार (जग) की डोर माता वैष्णवी भवानी के ही हाथों में है। इस धरती पर जो दिन, रात (रैन), शाम (सांझ) और सुबह (भोर) का चक्र चलता है, वह सब केवल माता के एक इशारे (संकेत) पर ही निर्भर है। माता वैष्णो देवी ही इस पूरे संसार का 'संचार' (Movement/Energy) हैं और वे ही इस अस्तित्व का मूल 'आधार' (Foundation) हैं। 2. ममता और महिमा का अनंत रूप (The Essence of Motherly Love): यद्यपि माता अत्यंत शक्तिशाली हैं, लेकिन भक्तों के लिए वे 'ममता रूपी सार' हैं (अर्थात् शुद्ध मातृ-प्रेम का प्रतीक हैं)। उनकी महिमा अपरंपार है और उनकी गौरव गाथा 'अमिट' है, जिसे युगों-युगों तक कोई मिटा नहीं सकता। जो भक्त इस ममतामयी स्वरूप की शरण में आता है, माता उसकी सभी विपदाएं हर लेती हैं। 3. त्रिकुटा पर्वत की वासिनी और महाशक्ति (The Form of Maha Shakti): दूसरे अंतरे में माता के दिव्य स्वरूप का वर्णन है। माता वैष्णो देवी नौ देवियों (नव दुर्गा) का ही सम्मिलित रूप हैं। वे साक्षात 'महाशक्ति' हैं जो त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान होकर पूरे संसार का पालन कर रही हैं। जीवन में मिलने वाले सुख और दुख (छाँव और धूप) सब उन्हीं की माया और आशीर्वाद हैं। माता ने केसरिया रंग का चोला (बाना) धारण किया हुआ है और उनका सिंदूरी रंग का स्वरूप अत्यंत सुहाना और मनमोहक लग रहा है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'वैष्णवी भवानी माँ के हाथों में जग की डोर' भजन का मुख्य भाव क्या है?

A1: यह भजन माता वैष्णो देवी को परब्रह्म और 'महाशक्ति' के रूप में स्थापित करता है। इसका मुख्य भाव यह है कि संसार की हर एक गतिविधि (दिन, रात, सुख, दुख) माता के ही नियंत्रण में है और वे ही इस पूरे ब्रह्मांड का मूल आधार हैं।

Q2: भजन में प्रयुक्त "पालनहारी है माँ त्रिकुटा" का क्या अर्थ है?

A2: माता वैष्णो देवी का पवित्र और विश्व-प्रसिद्ध दरबार जम्मू के कटरा में स्थित 'त्रिकुटा पर्वत' (Trikuta Mountains) की गुफा में विराजमान है। इसलिए उन्हें त्रिकुटा की वासिनी और पूरे संसार का पालन करने वाली 'पालनहारी' कहा गया है।

Q3: माता का चोला और स्वरूप कैसा बताया गया है?

A3: भजन की पंक्तियों ("रंग केसरिया माँ का बाना, सिन्दूरी रंग अंग सुहाना") के अनुसार, माता ने केसरिया रंग का वस्त्र (चोला) धारण किया है और उनका स्वरूप सिंदूरी रंग का, अत्यंत मनमोहक और अलौकिक है।

Categories: Navratri Special, Mata Ke Bhajan

Deity: Mata Vaishno Devi

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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