Shri Radha RaniBraj Ras

मुझे चढ़ गया राधा रंग (देवी चित्रलेखा) राधा रानी भजन लिरिक्स

Mujhe Chadh Gaya Radha Rang Lyrics (Devi Chitralekha) Lyrics Lyrics

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मुझे चढ़ गया राधा रंग (देवी चित्रलेखा) राधा रानी भजन लिरिक्स

MUJHE CHADH GAYA RADHA RANG LYRICS DEVI CHITRALEKHA LYRICS

मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग। मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥ श्री राधा नाम का रंग, रंग श्री राधा नाम का रंग। श्री राधा नाम का रंग, रंग श्री राधा नाम का रंग॥ अब करो न कोई तंग हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥ ऐसी कृपा बरसाई है, ऐसी कृपा बरसाई है। मुझे नाम की मस्ती छाई है, मुझे नाम की मस्ती छाई है। ओ हो, मुझे मस्ती छाई है, मुझे नाम की मस्ती छाई है॥ मैं झूम रही हूँ मस्ती में, मैं झूम रही हूँ मस्ती में। श्री राधा नाम की कश्ती में, श्री राधा नाम की कश्ती में। मैं तो हो गई मस्त मगन हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥ तू राधे-राधे बोल तो ले, तू राधे-राधे बोल तो ले। इस मुख में मिश्री घोल तो ले, इस मुख में मिश्री घोल तो ले। हाँ हाँ, इस मुख में मिश्री घोल तो ले, इस मुख में मिश्री घोल तो ले॥ तू हो जा राधा रानी का, तू हो जा राधा रानी का। वृंदावन की महारानी का, वृंदावन की महारानी का। सब चलो रे मेरे संग हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥ हो मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग। ओ हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

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मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग। मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

श्री राधा नाम का रंग, रंग श्री राधा नाम का रंग। श्री राधा नाम का रंग, रंग श्री राधा नाम का रंग॥

अब करो न कोई तंग हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

ऐसी कृपा बरसाई है, ऐसी कृपा बरसाई है। मुझे नाम की मस्ती छाई है, मुझे नाम की मस्ती छाई है। ओ हो, मुझे मस्ती छाई है, मुझे नाम की मस्ती छाई है॥

मैं झूम रही हूँ मस्ती में, मैं झूम रही हूँ मस्ती में। श्री राधा नाम की कश्ती में, श्री राधा नाम की कश्ती में। मैं तो हो गई मस्त मगन हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

तू राधे-राधे बोल तो ले, तू राधे-राधे बोल तो ले। इस मुख में मिश्री घोल तो ले, इस मुख में मिश्री घोल तो ले। हाँ हाँ, इस मुख में मिश्री घोल तो ले, इस मुख में मिश्री घोल तो ले॥

तू हो जा राधा रानी का, तू हो जा राधा रानी का। वृंदावन की महारानी का, वृंदावन की महारानी का। सब चलो रे मेरे संग हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग। रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

हो मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग। ओ हो, मुझे चढ़ गया राधा रंग, रंग मुझे चढ़ गया राधा रंग॥

मुझे चढ़ गया राधा रंग (देवी चित्रलेखा) राधा रानी भजन लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

परम श्रद्धेय देवी चित्रलेखा जी (Devi Chitralekha) की मधुर और उल्लास से भरी आवाज़ में गाया गया यह ब्रज भजन "मुझे चढ़ गया राधा रंग" 'राधा-नाम' की मस्ती और भक्ति के अलौकिक नशे का एक अत्यंत ही मनमोहक गीत है। जो भी इस भजन को सुनता है, वह झूमने पर मजबूर हो जाता है। यह भजन श्री राधा रानी के नाम के आलौकिक प्रेम और आनंद का एक बहुत ही उल्लासपूर्ण वर्णन है। भक्त संसार की सुध-बुध खोकर ईश्वरीय प्रेम में पूरी तरह से सराबोर (रंग) हो चुका है। इसके भावों को तीन मुख्य हिस्सों में समझा जा सकता है: 1. राधा नाम का गहरा रंग और अलौकिक मस्ती: भक्त खुशी से झूमते हुए कहता है कि मुझ पर श्री राधा रानी के नाम का इतना पक्का रंग चढ़ गया है कि अब मुझे दुनिया की कोई फिक्र नहीं है। वह संसार के लोगों से कहता है कि अब मुझे कोई 'तंग' मत करो (अर्थात मुझे सांसारिक मोह-माया में वापस मत खींचो), क्योंकि मैं राधा नाम के इस प्रेम रस में पूरी तरह डूब चुका हूँ और मुझे उनकी भक्ति की मस्ती छा गई है। 2. कृपा की कश्ती (नाव) में झूमता भक्त: दूसरे अंतरे में श्यामा जु (राधा रानी) की असीम कृपा का वर्णन है। भक्त कहता है कि उन्होंने मुझ पर ऐसी कृपा की बारिश की है कि मैं 'श्री राधा नाम' रूपी नाव (कश्ती) में बैठकर भवसागर को पार कर रहा हूँ और मस्ती में झूम रहा हूँ। इस कश्ती में बैठकर भक्त पूरी तरह से 'मस्त मगन' हो गया है। 3. मिश्री सा मीठा उपदेश और शरणागति: अंतिम भाग में, जो भक्त इस रंग में रंग चुका है, वह बाकी लोगों को भी एक बहुत ही प्यारा और मीठा उपदेश देता है। वह कहता है कि तुम बस एक बार अपने मुख से 'राधे-राधे' बोलकर तो देखो, ऐसा लगेगा जैसे मुंह में मिश्री (अमृत) घुल गई हो। तुम भी वृंदावन की उस महारानी के दास बन जाओ और मेरे साथ-साथ इस प्रेम की राह पर चलो, क्योंकि यह राधा नाम का रंग सबसे अनमोल है।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'मुझे चढ़ गया राधा रंग' भजन की मूल गायिका कौन हैं?

श्री राधा रानी के नाम की मस्ती से भरा यह अत्यंत प्रसिद्ध और आनंदमयी संकीर्तन परम श्रद्धेय देवी चित्रलेखा जी (Devi Chitralekha) द्वारा गाया गया है।

Q2: इस भजन में "इस मुख में मिश्री घोल तो ले" का क्या अर्थ है?

ब्रज रस में श्री राधा रानी के नाम को दुनिया का सबसे मीठा और आनंददायक नाम माना गया है। इसलिए भक्त कह रहा है कि एक बार 'राधे-राधे' बोलकर देखो, तुम्हें ऐसा लगेगा जैसे तुम्हारे मुँह में मिश्री (शक्कर/अमृत) घुल गई हो।

Q3: "श्री राधा नाम की कश्ती" से कवि का क्या आशय है?

'कश्ती' का अर्थ नाव होता है। यहाँ जीवन रूपी भवसागर को पार करने के लिए भगवान के 'नाम' को ही नाव बताया गया है। भक्त राधा नाम की कश्ती में बैठकर जीवन का सफर बिना किसी डर के तय कर रहा है।

Categories: Braj Ras

Deity: Shri Radha Rani

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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