Shri HanumanMangalvaar Bhajan

मोरे संकट के कटैया हनुमान (सुनील लोधी) लिरिक्स

More Sankat Ke Kataiya Hanuman Lyrics (Suneel Lodhi) Lyrics

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मोरे संकट के कटैया हनुमान (सुनील लोधी) लिरिक्स

MORE SANKAT KE KATAIYA HANUMAN LYRICS SUNEEL LODHI

॥ दोहा ॥ पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरत रूप, राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप। ॥ स्थायी ॥ ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।। अरे अंजनी पुत्र केसरी नंदन, तुम जग जग के काटत बंधन, तुमरे हृदय बसे रघुनंदन, की तुमरे हृदय में हाँ, तुमरे हृदय में बैठे सीताराम, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।। तुमको जानत है जग सारो, संकट मोचन नाम तुम्हारो, आके संकट हरो हमारो, कि तुमको संकट मोचन हाँ, तुमको संकट मोचन, मानत है भगवान, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।। बड़े बड़े दानव सब मारे, रामचंद्र के काज सँवारे, आके संकट हरो हमारे, ए लक्ष्मण जी के अरे हाँ, लक्ष्मण जी के, बचालए तुमने प्राण, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।। ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

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॥ दोहा ॥ पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरत रूप, राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप।

॥ स्थायी ॥ ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

अरे अंजनी पुत्र केसरी नंदन, तुम जग जग के काटत बंधन, तुमरे हृदय बसे रघुनंदन, की तुमरे हृदय में हाँ, तुमरे हृदय में बैठे सीताराम, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

तुमको जानत है जग सारो, संकट मोचन नाम तुम्हारो, आके संकट हरो हमारो, कि तुमको संकट मोचन हाँ, तुमको संकट मोचन, मानत है भगवान, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

बड़े बड़े दानव सब मारे, रामचंद्र के काज सँवारे, आके संकट हरो हमारे, ए लक्ष्मण जी के अरे हाँ, लक्ष्मण जी के, बचालए तुमने प्राण, हमारे संकट काटो प्रभु, हो मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु।।

मोरे संकट के कटैया हनुमान (सुनील लोधी) लिरिक्स Video

अर्थ (Bhavarth)

गायक सुनील लोधी (Suneel Lodhi) जी की आवाज़ में गाया गया यह एक बेहद ही लोकप्रिय और ऊर्जावान हनुमान भजन है! बुंदेली और स्थानीय लोकभाषा के स्पर्श के साथ गाया गया यह भजन सीधे हृदय में उतरता है। जब भी जीवन में कोई परेशानी या विपदा आती है, तो भक्त अपने 'संकट मोचन' को इसी सरल और आत्मीय भाव से पुकारते हैं। कटैया (Kataiya): काटने वाले या नष्ट करने वाले (Remover / Destroyer)। सुरभूप (Surbhoop): देवताओं के राजा या श्रेष्ठ देवता (King of gods)। काटत बंधन (Kaatat Bandhan): मोह-माया और दुखों की बेड़ियों को काटना (Breaking worldly chains)। रघुनंदन (Raghunandan): रघुकुल के आनंद, श्री राम। बचालए (Bachalaye): बचा लिए (Saved)। यह बुंदेली/स्थानीय लोकभाषा का शब्द है। संकट मोचन (Sankat Mochan): संकटों (मुसीबतों) से मोचन (मुक्ति) दिलाने वाले। संपूर्ण भावार्थ: भजन की शुरुआत 'हनुमान चालीसा' के प्रसिद्ध समापन दोहे से होती है, जिसमें भक्त प्रार्थना करता है कि राम, लक्ष्मण और सीता सहित हनुमान जी हमेशा उनके हृदय में निवास करें। भक्त अपनी स्थानीय भाषा में बड़े ही लाड से हनुमान जी को पुकारते हुए कहता है, "हे मेरे सारे संकटों को काटने (दूर करने) वाले हनुमान प्रभु! आप मेरे कष्टों को काट दीजिए।" भक्त उनकी महिमा गाते हुए कहता है कि हे अंजनी पुत्र और केसरी नंदन, आप सारे संसार के दुखों के बंधन काटते हैं और आपके हृदय में साक्षात् श्री सीताराम जी बैठे हैं। यह पूरा संसार जानता है कि आपका नाम ही 'संकट मोचन' है और स्वयं भगवान श्री राम भी आपको इसी रूप में मानते हैं; इसलिए आप आकर हमारे संकट भी हर लीजिए। आपने बड़े-बड़े राक्षसों (दानवों) को मारा, श्री राम के सारे बिगड़े काम संवारे और संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए थे, उसी तरह हे प्रभु! आप हमारे संकटों को भी काट दीजिए।

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Frequently Asked Questions

Q1: 'मोरे संकट के कटैया हनुमान' भजन के गायक कौन हैं?

A1: यह अत्यंत लोकप्रिय और मधुर हनुमान भजन प्रसिद्ध बुंदेली/लोक गायक सुनील लोधी (Suneel Lodhi) जी द्वारा गाया गया है। इनकी आवाज़ में यह गीत भक्तों के बीच बहुत पसंद किया जाता है।

Q2: भजन में प्रयुक्त शब्द "कटैया" का क्या अर्थ है?

A2: लोकभाषा में "कटैया" का अर्थ होता है 'काटने वाला' या 'जड़ से नष्ट करने वाला'। यहाँ भक्त बड़े ही अपनेपन के साथ हनुमान जी को संकटों और विपदाओं को काटने (दूर करने) वाला कह कर पुकार रहा है।

Q3: "लक्ष्मण जी के बचालए तुमने प्राण" पंक्ति किस प्रसंग की ओर इशारा करती है?

A3: यह पंक्ति रामायण के उस प्रसंग की ओर इशारा करती है जब मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे। तब हनुमान जी ने पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठाकर संजीवनी बूटी ला दी थी और लक्ष्मण जी के प्राण 'बचा लिए' (बचालए) थे।

Categories: Mangalvaar Bhajan

Deity: Shri Hanuman

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Mohit Tarkar
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मोहित तरकरMohit Tarkar

संस्थापक एवं मुख्य संपादक Founder & Chief Editor

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